पीलीभीत: साठगांठ से दो विभागों में काम कर रहे लिपिक का संबद्धीकरण निरस्त
पीलीभीत, अमृत विचार। सात वर्षों से सीएमओ कार्यालय के लिपिक राजेश कुमार साठगांठ के चलते खाद्य एवं औषधि विभाग में गलत तरीके से संबद्धीकरण कराकर वहां जमे हुए थे। इस मामले को नियम विरुद्ध बताते हुए एडीएम एफआर ने उसे निरस्त कर दिया है। उन्हें उनकी मूल तैनाती पर ही वापस भेज दिया है। अब कार्यालय …
पीलीभीत, अमृत विचार। सात वर्षों से सीएमओ कार्यालय के लिपिक राजेश कुमार साठगांठ के चलते खाद्य एवं औषधि विभाग में गलत तरीके से संबद्धीकरण कराकर वहां जमे हुए थे। इस मामले को नियम विरुद्ध बताते हुए एडीएम एफआर ने उसे निरस्त कर दिया है। उन्हें उनकी मूल तैनाती पर ही वापस भेज दिया है। अब कार्यालय में तैनात लिपिक को कार्यभार सौंपा गया है।
सीएमओ कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक के पद पर कार्यरत राजेश कुमार ने कार्यालय के अलावा कलेक्ट्रेट के खाद्य एवं औषधि विभाग में अपना संबद्धीकरण करा रखा था। वह सात सालों से औषधि विभाग में वरिष्ठ लिपिक के पद पर काम कर रहे थे। जबकि नियम है कि किसी भी कर्मचारी का मूल तैनाती के अलावा अन्य विभाग में संबद्धीकरण नहीं किया जाएगा। तत्कालीन एडीएम अजय कांत सैनी ने उनका संबद्धीकरण निरस्त भी किया था लेकिन खाद्य एवं औषधि विभाग में प्रति माह मिलने वाली मोटी कमीशन और लाइसेंस आवंटन पर मिलने वाली रिश्वत के लालच में लिपिक ने दोबारा से साठगांठ कर अपना संबद्धीकरण उसी कार्यालय में करा लिया।
खास बात यह है कि संबद्धीकरण के बाद भी औषधि कार्यालय में विभाग का कोई काम नहीं किया जाता है। औषधि निरीक्षक का कहना है कि वह स्वयं ही अपना काम करतीं हैं। इस संबंध में औषधि निरीक्षक और अभिहित अधिकारी के द्वारा उन्हें हटाने के लिए पत्र भी लिखा था मगर, इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई थी। मामला उजागर होने के बाद सोमवार को एडीएम एफआर राम सिंह गौतम ने उन्हें तत्काल प्रभाव से वहां से हटा दिया है। अब वह सिर्फ सीएमओ कार्यालय में ही काम करेंगे। एडीएम एफआर राम सिंह गौतम ने बताया कि लिपिक का कार्यालय से संबद्धीकरण निरस्त कर दिया है। उनके स्थान पर अन्य कर्मचारी की तैनाती की जाएगी।
पहले भी कई विवादों में घिरे चुके राजेश
खाद्य एवं औषधि विभाग से हटाए गए लिपिक राजेश कुमार पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं। उन पर सीएमओ कार्यालय में भी अपनी पुन: तैनाती करने और आय से अधिक संपत्ति का भी मामला चल रहा है। जिसमें उन पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है मगर, साठगांठ के चलते उन पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
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