बरेली: 1 अप्रैल से पैरासिटामाल से लेकर सोफ्रामाइसिन तक महंगा
बरेली, अमृत विचार। रसोई गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आने के बाद महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी को अब इलाज कराने में भी जेब ढीली करनी पड़ेगी। दरअसल एनपीपीए ( नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ) ने दवा कंपनियों को 800 से ज्यादा शेड्यूल दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति …
बरेली, अमृत विचार। रसोई गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आने के बाद महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी को अब इलाज कराने में भी जेब ढीली करनी पड़ेगी। दरअसल एनपीपीए ( नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ) ने दवा कंपनियों को 800 से ज्यादा शेड्यूल दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है।
जिसके बाद 1 अप्रैल से कई दवाएं महंगी होने वाली हैं। इन बढ़ती कीमतों पर दवा व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों का हवाला देकर दाम बढ़ाए जा रहे हैं। कच्चे माल पर दाम अगर कम होते हैं तो दवाओं पर भी कम होने चाहिए। दरअसल कोरोना महामारी के बाद से फार्मा इंडस्ट्री दवाओं की कीमत बढ़ाए जाने की लगातार मांग कर रही थी।
एनपीपीए ( नेशनल फार्मा प्राइसिंग अथॉरिटी) ने शेड्यूल ड्रग्स के लिए कीमतों में 10.76 फीसद बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी है। शेड्यूल ड्रग्स में आवश्यक दवाएं शामिल हैं और इनकी कीमतों पर नियंत्रण होता है। इनके दाम बगैर अनुमति नहीं बढ़ाए जा सकते हैं। जिन दवाओं के दाम बढ़ने जा रहे हैं उनमें पेनकिलर और एंटी बायोटिक जैसे पैरासिटामॉल, फिनाइटोइन सोडियम, मेट्रोनिडाजोल जैसी दवाएं शामिल हैं। दवा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि चाइना से कच्चा माल नहीं आ रहा है।
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