पर्यावरण की चुनौती

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Edited By Amrit Vichar
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पर्यावरण की दृष्टि से बहस होती है कि पेड़ काटना उचित नहीं है, लेकिन विकास कार्यों के लिए पेड़ काटने की मंजूरी दी जा सकती है। प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या के मामले में दुनिया के 151 देशों में भारत 125वें स्थान पर आता है। पेड़ों की कटाई को लेकर चौंकाने वाला एक आंकड़ा पिछले …

पर्यावरण की दृष्टि से बहस होती है कि पेड़ काटना उचित नहीं है, लेकिन विकास कार्यों के लिए पेड़ काटने की मंजूरी दी जा सकती है। प्रति व्यक्ति पेड़ों की संख्या के मामले में दुनिया के 151 देशों में भारत 125वें स्थान पर आता है। पेड़ों की कटाई को लेकर चौंकाने वाला एक आंकड़ा पिछले दिनों सरकार ने संसद में पेश किया है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने लोकसभा में बताया है कि सिर्फ वर्ष 2020-21 में ही देश के विभिन्न हिस्सों में 30 लाख 97 हजार 721 पेड़ काटे गए थे। पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़े ये भी बताते हैं कि पिछले पांच सालों में 1.20 करोड़ पेड़ों को काटने की इजाजत दी गई है। विचारणीय है कि विश्व के कुल क्षेत्रफल में 2.4 प्रतिशत पर दुनिया की जनसंख्या का 17.5 प्रतिशत वाला देश भारत आज पर्यावरणीय मुद्दों का प्रबंधन करने में पीछे रह गया है।

पेड़ों को काटने को लेकर जब भी सवाल उठता है तो प्रशासन की यह दलील रहती है कि वे कानून के अनुसार पौधे लगाकर इसकी भरपाई कर रहे हैं। प्रतिपूरक वनीकरण कितना लाभकारी है, यह हमेशा सवालों के घेरे में रहा है। मंत्रालय के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में विभिन्न राज्यों में पेड़ों की कटाई के बदले 3 करोड़ 64 लाख 87 हजार पौधे लगाए गए थे, इसमें 358.87 करोड़ रुपये का खर्चा आया है।

प्रतिपूरक वनीकरण के पीछे सोच भले ही अच्छी हो, लेकिन इसके नतीजे भी लाभकारी हों, यह जरूरी नहीं है। कई बार हरे-भरे, दशकों पुराने वनों को काटकर जो नए पौधे रोपे जाते हैं, उसमें से अधिकतर सूख जाते हैं या मवेशी वगैरह उन्हें खा जाते हैं। उनके रखरखाव के लिए भारी-भरकम राशि मिलने के बावजूद पौधे पनप नहीं पाते हैं, अलबत्ता भ्रष्टाचार जरूर बढ़ जाता है।

देश में पर्यावरण का संरक्षण करने के लिए तक़रीबन 200 से भी अधिक कानून हैं, लेकिन लगभग सभी कानूनों का खुलेआम उल्लंघन होता है इसलिए भारत सर्वाधिक प्रदूषित देशों की सूची में आता है और पर्यावरण संरक्षण के लिए कोई कदम अभी तक प्रभावी सिद्ध नहीं हो पाए हैं।

हालांकि जलवायु परिवर्तन की वजह से जो चुनौतियां सामने आ रही हैं, भारत उनके प्रति जागरूक है और सक्रियता से काम भी कर रहा है। फिर भी सरकार को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीरता से सोचना ही होगा। पर्यावरण के प्रति हमें अपना नजरिया बदलना होगा क्योंकि हरे-भरे पेड़ों को काटकर हम भावी पीढ़ियों से स्वस्थ जीवन का आधार ही छीन रहे हैं।