नैनीताल: सात वर्षों में इस बार मार्च में नैनी झील में दर्ज हुआ सबसे अधिक पानी
नैनीताल, अमृत विचार। नैनी झील में सात साल बाद मार्च माह में सबसे अधिक पानी रिकॉर्ड किया गया है। गुरुवार को झील का जलस्तर 7 फीट 4 इंच दर्ज किया गया। बीते साल मार्च के अंत में झील का जलस्तर एक फीट 79 इंच था। वहीं, वर्ष 2020 के मार्च के अंत में झील का …
नैनीताल, अमृत विचार। नैनी झील में सात साल बाद मार्च माह में सबसे अधिक पानी रिकॉर्ड किया गया है। गुरुवार को झील का जलस्तर 7 फीट 4 इंच दर्ज किया गया। बीते साल मार्च के अंत में झील का जलस्तर एक फीट 79 इंच था। वहीं, वर्ष 2020 के मार्च के अंत में झील का अधिकतम जलस्तर सात फीट था।
बता दें कि नैनी झील की देखरेख का कार्य सिंचाई विभाग की ओर से किया जा रहा है। इस बार अधिक बर्फबारी होने की वजह से मार्च के अंत तक झील का जलस्तर ठीक बना हुआ है। झील के लबालब होने से उम्मीद की जा रही है कि इससे गर्मियों में पानी की किल्लत नहीं होगी। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता केसी चौहान ने बताया कि मार्च के अंत में अधिकतम जलस्तर 7 फीट से अधिक दर्ज किया गया है। इससे मानसून तक पानी की परेशानी नहीं होने की उम्मीद है।
31 मार्च में अब तक सात वर्षों का जलस्तर
2016 1 फीट 8 इंच
2017 3 फीट 45 इंच
2018 1 फीट 15 इंच
2019 4 फीट 5 इंच
2020 7 फीट
2021 1 फीट 79 इंच
2022 7 फीट 4 इंच
पिछले सात वर्षों से नैनी झील से नहीं निकाली गई सिल्ट
नैनीताल। पिछले सात वर्षों से नैनी झील से सिल्ट नहीं निकाली गई है। गुरुवार को कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने नैनी झील की सफाई को लेकर विशेषज्ञों की राय के बाद इस पर कार्य करने को कहा।
बता दें कि नैनीताल में ब्रिटिश काल के बाद वैध और अवैध निर्माणों का मलबा शहर के चारों तरफ बने 62 नालों के माध्यम से झील में मिलता है। कुछ वर्ष पहले तक झील की सफाई का काम नियमित होता था, लेकिन पिछले सात वर्षों से संबंधित जिलाधिकारी इससे कन्नी काटते रहे।
झील से मलबे को गर्मियों के सीजन के समय ही हटाया जाता है। क्योंकि इस दौरान झील का पानी अपने न्यूनतम या उससे भी कम स्तर पर होता है। नैनी झील में मशीनों से अंतिम बार वर्ष 2015 में मलबा यानी कि सिल्ट निकाली गई थी। इसके बाद वर्ष 2017 में हाथों से मैन्युली सफाई की गई थी। संयोग की बात ये है कि इन दोनों वर्षों में आईएएस दीपक रावत नैनीताल के जिलाधिकारी थे।
वर्तमान में वह आयुक्त और अध्यक्ष झील विकास प्राधिकरण जैसे पदों पर हैं। उनका कहना है कि झील के अस्तित्व को बचाने के लिए सिल्ट को निकालना तो जरूरी है लेकिन इसे बिना विशेषज्ञों की राय के किया जाना खतरनाक है, इसलिए पहले विशेषज्ञों की राय ली जाएगी।
