पड़ोस में अशांति

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Edited By Amrit Vichar
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पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नेशनल असेंबली को भंग करवाकर नए चुनाव का रास्ता साफ कर दिया है। रविवार को डिप्टी स्पीकर ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया। विपक्ष ने उम्मीद लगा रखी थी कि इमरान के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इमरान खान …

पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नेशनल असेंबली को भंग करवाकर नए चुनाव का रास्ता साफ कर दिया है। रविवार को डिप्टी स्पीकर ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया। विपक्ष ने उम्मीद लगा रखी थी कि इमरान के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इमरान खान आखिरी गेंद तक मुकाबला करने की बात करते रहे। इस बीच पाकिस्तानी सेना ने कहा कि उसका इस राजनीतिक हलचल से कोई लेना देना नहीं है।

जबकि पाकिस्तान के 73 साल से अधिक लंबे इतिहास में उस पर आधे से ज्यादा समय तक शक्तिशाली सेना की हुकुमत रही है। इमरान खान 2018 में सत्ता में आए थे। चुनाव में इमरान की जीत के पीछे पाकिस्तान सेना का हाथ बताया गया था। लेकिन सेना और इमरान का एक-दूसरे से जल्दी ही मोहभंग हो गया। दोनों एक-दूसरे के विरुद्ध कदम उठाने लगे। हाल के दिनों में पाकिस्तान की राजनीति में सारे दांव-पेंच खेले गए हैं। भारत के नजरिये से देखें तो पाकिस्तान में अगर कोई नई सरकार आ भी जाती तो दोनों देशों के संबंधों को निर्धारित करने वाली बुनियादी बातों में कोई बदलाव नहीं आने वाला था।

चूंकि दोनों ही देशों के राजनयिक संबंध सीमित हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संवाद कम ही हैं। ध्यान रहे पाकिस्तान कई दशकों तक अमेरिका का पिछलग्गू बना रहा। सोवियत संघ के विघटन के बाद जब अमेरिका और रूस के बीच का तनाव थोड़ा कम हुआ, तब पाकिस्तान ने रूस के साथ संबंध बनाने की कोशिश शुरू की थी।

वह भारत के प्रतिद्वंद्वी चीन के साथ तो कई वर्षों से जुड़ा ही हुआ था। उसने कश्मीर की हजारों मील जमीन भी चीन को सौंप रखी थी। इमरान सरकार के दो मंत्री भारत पर परमाणु हमलों की धमकी देते रहे पर वे चुप्पी साधे रहे। अब जब लगा कि वे प्रधानमंत्री पद से विदा हो रहे हैं तो उन्हें भारत की विदेश नीति की प्रशंसा करनी पड़ी। शनिवार को ही इमरान खान ने कहा था कि प्रतिष्ठान की ओर से उन्हें तीन विकल्प दिए गए। इस्तीफा, अविश्वास प्रस्ताव या चुनाव।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि ‘प्रतिष्ठान’ से उनका इशारा किस तरफ है। कहा जा सकता है कि इस समय भारत के पड़ोस में भारी अस्थिरता है। श्रीलंका में आपातकाल लागू है। पाक प्रायोजित आतंकवाद के चलते अविश्वास भारत व पाकिस्तान के बीच संबंधों की पहचान बन चुका है। पाकिस्तान में पूरी तरह से अराजकता फैलने का डर है। ऐसे में भारत को आगामी घटनाक्रम पर पैनी नजर रखनी होगी।