रुद्रपुर: युवक की हत्या में सगे भाइयों समेत तीन को आजीवन कारावास

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रुद्रपुर, अमृत विचार। दस साल पहले अटरिया मेले में आइसक्रीम स्टॉल लगाने को लेकर एक युवक की हत्या के मामले में न्यायालय ने गुरुवार को फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सुशील तोमर ने इस मामले में दो सगे भाइयों सहित तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सहायक जिला शासकीय …

रुद्रपुर, अमृत विचार। दस साल पहले अटरिया मेले में आइसक्रीम स्टॉल लगाने को लेकर एक युवक की हत्या के मामले में न्यायालय ने गुरुवार को फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सुशील तोमर ने इस मामले में दो सगे भाइयों सहित तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीपक अरोड़ा ने बताया कि आवास विकास रुद्रपुर निवासी हर्ष अरोड़ा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि छह मई 2012 को दोपहर तीन बजे वह अपने भाई गौरव अरोरा के साथ घर पर खाना आ रहे था। तभी जगतपुरा निवासी दीपक बिष्ट ने गौरव को आवाज लगायी। जिसे सुनकर भाई गौरव अरोरा बाहर आया। उस वक्त दीपक के साथ दो और लोग भी खडे़ थे। गौरव के साथ दीपक थोड़ी दूर चला गया। इस पर गौरव की मां भी घर से बाहर आई।

उन्होंने युवकों से गौरव के बारे में पूछा, तो वह बिना कुछ बोले चल दिये। शक होने पर परिजन गौरव को ढूंढते हुये निकले। होली चौक स्थित एक पब्लिक स्कूल के सामने उन्होंने देखा कि कुछ लोग उसके भाई गौरव अरोरा पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर रहे हैं। यह देख उन्होंने शोर मचाया तो पड़ोसी मनोज पंत बचाने आया। जिस पर हमलावरों ने उस पर भी जानलेवा हमला कर दिया और भाग गये। जिसके बाद वह घायल अवस्था में गौरव को अस्पताल ले गये।

जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले में पुलिस ने अगले दिन सात मई को लोकेंद्र सिंह व कपिल कुमार सिंह निवासी चकेरी पंचगेई जिला कांशीरामनगर हाल निवासी आवास विकास रुद्रपुर और दीपक बिष्ट निवासी जगतपुरा को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही कपिल सिंह की निशानदेही पर पुलिस ने करतारपुर रोड से चीमा फार्म को जाने वाली सड़क से घटना में इस्तेमाल चाकू भी बरामद कर लिया।

हर्ष ने बताया कि घटना से दो साल पहले अटरिया मेला में आइसक्रीम का स्टॉल लगाने को लेकर विवाद हो गया था। जिसको लेकर वह लोग उनसे रंजिश रखते थे। तीनों के विरुद्ध अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में मुकदमा चला। एडीजीसी दीपक अरोरा ने 13 गवाह पेश कर आरोप सिद्ध कर दिये। जिसके बाद एडीजे सुशील तोमर ने तीनों को धारा 302/34 आईपीसी के तहत आजीवन कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही कपिल को धारा 4/25 शस्त्र अधिनियम के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास और पांच सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

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