मुरादाबाद : सिटीजन चार्टर का पुलिस कार्यालयों में मजाक, सत्यापन के बाद भी डेढ़ माह से लंबित हैं पासपोर्ट की फाइलें

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मुरादाबाद,अमृत विचार। जिले में पुलिस कार्यालयों में लगे सिटीजन चार्टर के बोर्ड महज दिखाने के लिए हैं। इन बोर्ड पर लिखे काम ना तो समय पर होते हैं और ना ही बिना किसी सिफारिस के। आए दिन इस संबंध में शिकायतें भी आ रही हैं। इन शिकायतों पर उच्चाधिकारियों द्वारा हिदायतें भी दी जाती है। …

मुरादाबाद,अमृत विचार। जिले में पुलिस कार्यालयों में लगे सिटीजन चार्टर के बोर्ड महज दिखाने के लिए हैं। इन बोर्ड पर लिखे काम ना तो समय पर होते हैं और ना ही बिना किसी सिफारिस के। आए दिन इस संबंध में शिकायतें भी आ रही हैं। इन शिकायतों पर उच्चाधिकारियों द्वारा हिदायतें भी दी जाती है। बावजूद इसके स्थिति जस की तस बनी हुई है। यह स्थिति उस समय है जब खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नए कार्यकाल में ही कई बार सिटीजन चार्टर को लेकर दिशा निर्देश दे चुके हैं। अभी हाल ही में उन्होंने जिला स्तरीय अधिकारियों को इसी संबंध में कड़ी चेतावनी भी दी है।

लोक कल्याणकारी शासन व्यवस्था के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश में लागू सिटीजन चार्टर लागू किया है। राज्य में इस व्यवस्था की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी गृह विभाग के पास है। विभाग की ओर से अधिकारियों को साफ तौर पर कहा गया है कि सभी कार्यालयों में सिटीजन चार्टर को कड़ाई से लागू किया जाए। खुद मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले वीडियो कांफ्रेंसिंग में अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि निर्धारित समय के अंदर फाइलें नहीं निपटाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। बावजूद इसके जिले में सिटीजन चार्टर के नाम पर खानापूर्ति बदस्तूर जारी है। आलम यह है कि तहरीर पर तत्काल मुकदमा दर्ज करने की व्यवस्था के बावजूद एक सप्ताह तक लोगों को पुलिस कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

केस हिस्ट्री: 1
शहर के रहने वाले मेहराज आलम ने ट्विटर पर शिकायत दी है। बताया कि दो मार्च को फ्रेस पासपोर्ट के लिए तारीख मिली थी। फाइल नंबर BL4066149049822 हैं। आठ मार्च को पुलिस वेरिफिकेशन भी हो गया, लेकिन अभी तक वेरिफिकेशन की रिपोर्ट पासपोर्ट कार्यालय नहीं पहुंची है। मुरादाबाद पुलिस की सोशल मीडिया सेल ने इसके जवाब में बताया है कि इस संबंध में संबंधित को निर्देशित कर दिया गया है, लेकिन जब आवेदक ने पूछा कि कब तक फाइल पासपोर्ट कार्यालय पहुंचेगी तो सोशल मीडिया सेल ने चुप्पी साध ली।

केस हिस्ट्री: 2
अमरोहा गेट की रहने वाली मंजू खन्ना ने बताया कि उनके घर में तीन अप्रैल को चोरी हुई थी। तत्काल थाने में शिकायत दे दी, लेकिन पुलिस ने पांच दिन तक मुकदमा दर्ज नहीं किया। आखिर में उन्होंने उच्चाधिकारियों को शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है। चोरों ने उनके घर से पांच लाख रुपये से अधिक कीमत के नगदी और जेवर पर हाथ साफ कर दिया था।

क्या है सिटीजन चार्टर
सिटीजन चार्टर में विभिन्न सरकारी कार्यालयों में नागरिकों के अधिकार की जानकारी दी गई है। इसमें विभिन्न कार्यों के लिए एक समय सीमा तय की गई है। जैसे कि थाने पर दी गई सूचना पर एफआईआर या एनसीआर निशुल्क दर्ज होगी। इसकी एक प्रति निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। पुलिस दूसरे थाना क्षेत्र की घटना या गलत सूचना कहकर एफआईआर दर्ज करने से मना नहीं कर सकती। पुलिस बिना कारण बताए गिरफ्तार नहीं कर सकती है। महिलाओं की गिरफ्तारी सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले नहीं की जा सकती है। इसी प्रकार पासपोर्ट, शस्त्र लाइसेंस, पीवीआर, एमवीआर, जीआर, सीवीआर, कार्यक्रमों के आयोजन संबंधी प्रार्थना पत्र आदि के सत्यापन के लिये आवेदक को थाने आने की अवश्यकता नहीं है।

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