बढ़ा तनाव

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Edited By Amrit Vichar
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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध ठीक नहीं चल रहे हैं। अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमले में 45 लोगों की मौत हो गई। दोनों पक्ष एक दूसरे पर कई तरह के आरोप लगा रहे हैं। डूरंड लाइन पर फरवरी में भी दोनों ओर से गोलाबारी हुई थी और तनाव काफी बढ़ गया था। संयुक्त …

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध ठीक नहीं चल रहे हैं। अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमले में 45 लोगों की मौत हो गई। दोनों पक्ष एक दूसरे पर कई तरह के आरोप लगा रहे हैं। डूरंड लाइन पर फरवरी में भी दोनों ओर से गोलाबारी हुई थी और तनाव काफी बढ़ गया था। संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के राजदूत ने कहा कि यह अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता पर हमला और अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के सहायक मिशन (यूनामा) ने भी कहा कि खोस्त और कुनाव प्रांतों में हवाई हमलों के कारण बच्चों और महिलाओं सहित 45 नागरिकों की मौत की खबरें बेहद चिंता की बात है। शुक्रवार को उत्तरी वजीरिस्तान के कबायली इलाके में घात लगा कर किए गए हमले में पाकिस्तानी सेना के सात सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हमले का जवाब देने की चेतावनी दी थी।

पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान की जमीन से आतंकवादी गुट पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। उधर तालिबान पाकिस्तानी चरमपंथियों को पनाह देने के आरोप से इनकार करता है। हालांकि दोनों देशों के बीच 2700 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाने से नाराज भी है। यह सीमा रेखा डूरंड लाइन कही जाती है जो औपनिवेशिक दौर में खींची गई थी।

पाकिस्तान के साथ संबंधों को देखते हुए अब तालिबान भारत और ईरान के साथ बेहतर संबंध बनाने का इच्छुक है। तालिबान कह चुका है कि पाकिस्ताभन के साथ संबंधों की कीमत पर भारत के साथ रिश्तों को खराब नहीं करेगा। बता दें कि तालिबान सरकार आने के बाद भारत ने अफगानिस्तान की सरकार को मान्यता नहीं दी है लेकिन अफगान जनता के लिए लगातार मदद कर रहा है।

भारत ने काबुल में बच्चों के अस्पसताल के लिए दवाएं और गेहूं भेजा है। भारत ने साल 2022 के लिए बजट में 200 करोड़ का प्रावधान अफगानिस्तांन के लिए किया है। भारत की सहायता उसके लिए एक कूटनीतिक अवसर है लेकिन पाकिस्तान और वहां मौजूद आतंकी समूहों के साथ तालिबान की नज़दीकी की वजह से जो सुरक्षा चिंताएं हैं, उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है।

बदले वैश्विक हालात में क्षेत्रीय ताकतों की अफगान राजनीति में रुचि कम हो गई है। भारत इस क्षेत्र में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर लगातार सावधान रहता है। तालिबान-पाकिस्तान के बीच रिश्तों में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय ताकतों से तालिबान की तरफ से मांगी जा रही मदद के कारण भारत की ज्यादा हिस्सेदारी उसके लिए अफगानिस्तान में अपने हितों को सुरक्षित रखने की जगह बनाएगी।