हल्द्वानी: उत्तर पश्चिम हवा ने ट्रंचिंग ग्राउंड के धुएं को और खतरनाक बनाया, वैज्ञानिकों ने चेताया
हल्द्वानी, अमृत विचार। ट्रंचिंग ग्राउंड में लगी आग की वजह से पैदा हो रहा जहरीला धुआं केवल हल्द्वानी वालों की सेहत के लिए ही खतरा नहीं है बल्कि इससे पास के पहाड़ के पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। हिमालयी वैज्ञानिकों ने इस प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। ट्रंचिंग ग्राउंड में लगी आग …
हल्द्वानी, अमृत विचार। ट्रंचिंग ग्राउंड में लगी आग की वजह से पैदा हो रहा जहरीला धुआं केवल हल्द्वानी वालों की सेहत के लिए ही खतरा नहीं है बल्कि इससे पास के पहाड़ के पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। हिमालयी वैज्ञानिकों ने इस प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है।
ट्रंचिंग ग्राउंड में लगी आग को बुझाते कर्मचारी: VIDEO
रविवार को गौलापार के ट्रंचिंग ग्राउंड में लगी आग अभी भी धधक रही है। इस आग को बुझाने का काफी प्रयास किया गया है। इसके बाद भी आग काबू में नहीं आ रही है। यहां पैदा हो रहा जहरीला धुआं केवल हल्द्वानी व आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए ही खतरे का सबब नहीं है बल्कि हिमालय की तहलटी में पैदा हो रहा धुआं पास के पहाड़ों के पर्यावरण के लिए खतरा बन रहा है।

हिमालयी वैज्ञानिकों ने बताया कि हल्द्वानी शिवालिक पर्वत श्रेणी की तहलटी में बसा शहर है। यहां का प्रदूषण पहाड़ पर प्रभाव डालता है। गौलापार के ट्रंचिंग ग्राउंड में लगी आग का धुआं उत्तर पश्चिमी हवा की वजह से हिमालय क्षेत्र की ओर जा रहा है। इसके कार्बन के कण पहाड़ के नदी, नौलों और नदियों में जाकर समा रहे हैं। इससे वहां का जल प्रदूषित होने का खतरा है।
जल प्रदूषित होने से जल के अंदर रहने वाले जलीय जीव भी खतरे के दायरे में हैं। हिमालयी वैज्ञानिकों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि पर्वतीय रेंज के तहलटी में बसे आबादी वाले क्षेत्रों में कम से कम प्रदूषण होना चाहिए। नहीं तो यह पूरे पहाड़ के लिए खतरा बन सकता है।
अगर हल्द्वानी शहर में कहीं भी लंबे समय धुआं उठता रहेगा तो यह पहाड़ के लिए भी खतरनाक होगा। पहाड़ की ओर हवा बहने पर धुएं के कण पहाड़ की ओर आएंगे और पहाड़ में नदी, नौलों और झीलों के पर्यावरण के लिए खतरा बनेगा। – डॉ. जेसी कुनियाल, हिमालयी वैज्ञानिक, जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी कटारमल
