हल्द्वानी: प्रकृति से नाता जोड़ कराया Feel Good, घर-आंगन से बिखेरी हरियाली

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हल्द्वानी, अमृत विचार। प्रकृति मुफ्त में हवा बेशकीमती देती है, सांस लेने और जिंदा रहने का आधार देती है, लोग वेंटिलेटर से ऑक्सीजन को कीमत समझते हैं, फिर क्यों जिंदगी देने वाले पेड़ और प्रकृति से खिलवाड़ करते हैं। इन पंक्तियों में छुपे मर्म को हर पल समझा जा सकता है लेकिन यह भी एक …

हल्द्वानी, अमृत विचार। प्रकृति मुफ्त में हवा बेशकीमती देती है, सांस लेने और जिंदा रहने का आधार देती है, लोग वेंटिलेटर से ऑक्सीजन को कीमत समझते हैं, फिर क्यों जिंदगी देने वाले पेड़ और प्रकृति से खिलवाड़ करते हैं। इन पंक्तियों में छुपे मर्म को हर पल समझा जा सकता है लेकिन यह भी एक कटु सत्य है कि हमने कभी पेड़ों के महत्व का समझा ही नहीं। शायद यही वजह है कि आज हम सब पृथ्वी दिवस मनाने को मजबूर हुए हैं।

बात अगर शहर हल्द्वानी की करें तो यहां मुख्य सड़कों के किनारे हरे-भरे पेड़ खत्म होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। उन्हें सुखाने और जड़ से खत्म करने की साजिश होती रही लेकिन शासन-प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया। लेकिन इस दुखद तस्वीर के बीच समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने घर-आंगन में हरियाली बिखेर कर न केवल खुद को बल्कि समाज को भी सुखद एहसास की अनुभूति करवा रहे हैं।

कुंतीपुरम, हिम्मतपुर तल्ला निवासी शिक्षाविद संतोष मिश्र और गीता मिश्र ने अपनी दो बेटियों हिमानी और शिवानी मिश्र के साथ रोपे बेडू, तिमिला, शहतूत, करी पत्ता और नीम के पौधे।

हल्द्वानी के कुंतीपुरम, हिम्मतपुर तल्ला निवासी शिक्षाविद संतोष मिश्र और गीता मिश्र भी अपनी दो बेटियों हिमानी और शिवानी मिश्र के साथ प्रकृति को संवारने की मुहिम में जुटे हैं। उन्होंने इसकी शुरुआत अपने घर आंगन से की है। मिश्र परिवार ने प्रकृति प्रेमियों से आग्रह किया कि अपने घर की हरियाली के लिए विदेशी पौधों की जगह स्थानीय पौधों को लगाने का प्रयास करें। परिवेश में स्वतः ही उग आने वाले ऐसे पौधों को देखरेख की जरूरत भी नहीं पड़ती है, उनमें कीटों का प्रकोप भी न के बराबर होता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमाल की होती है। यही वजह है कि उन्होंने घर में बेडू, तिमिला, शहतूत, करी पत्ता, नीम के पौधे रोपे हैं।

पेड़-पौधों के बीच समय बितातीं वरिष्ठ साहित्यकार बीना भट्ट बड़शिलिया।

प्रकृति को संवारने की कुछ ऐसी ही सुखद पहल हल्द्वानी की वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षिका बीना भट्ट बड़शिलिया ने भी की है। उन्होंने घर के आंगन में नीम, पारिजात, ऐरेमा पाम, मनी प्लांट, अशोक समेत कई पौंधे लगाकर हरियाली का संदेश दिया है। उम्मीद है कि पर्यावरण को संवारने के लिए घर आंगन से निकली यह पहल शासन-प्रशासन से जुड़े अधिकारियों तक भी पहुंचेगी जिसके शहर की फिजा को हरा भरा रखने वाले पेड़- पौधों का संसार समृद्ध हो सके। तभी सही मायनों में पृथ्वी दिवस भी सफल हो पाएगा।

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