रुद्रपुर: फिर से सुर्खियों में आया एनएच 74 घोटाला, 6 साल से कछुआ गति से चल रही जांच
रुद्रपुर, अमृत विचार। राष्ट्रीय राजमार्ग-74 घोटाले का मामला एक बार फिर से सुर्खियां बनता दिख रहा है। गुरुवार को चंपावत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसको लेकर बयान देकर फिर से मामले को हवा दे दी है। उम्मीद की जा रही है कि पिछले छह साल से जांच-जांच के खेल में फंसे इस घोटाले …
रुद्रपुर, अमृत विचार। राष्ट्रीय राजमार्ग-74 घोटाले का मामला एक बार फिर से सुर्खियां बनता दिख रहा है। गुरुवार को चंपावत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसको लेकर बयान देकर फिर से मामले को हवा दे दी है। उम्मीद की जा रही है कि पिछले छह साल से जांच-जांच के खेल में फंसे इस घोटाले पर से पर्दा उठेगा।
सितारगंज से हरिद्वार तक 252 किमी दूरी के एनएच-74 के निर्माण के लिए वर्ष 2012-13 में प्रक्रिया शुरू की गई। यह काम दो हिस्सों में होना था। एक हिस्सा सितारगंज से काशीपुर तो दूसरा हिस्सा काशीपुर से नगीना होते हुये हरिद्वार का था। 2016 में इस घोटाले का खुलासा तब हुआ था जब तत्कालीन मंडलायुक्त डी. सेंथिल पांडियन ने भूमि अधिग्रहण से संबंधित फाइलें तलब की थीं। तब खुलासा हुआ था कि कृषि भूमि को गैर कृषि दर्शाकर भारी भरकम मुआवजा लेकर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया गया है। इसमें भू-स्वामी किसानों से लेकर सफेदपोश नेता व अधिकारी तक सभी शामिल थे।
सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाकर जांच शुरू करा दी थी। जांच में सामने आया था कि भूमि अधिग्रहण का यह खेल करीब 400 करोड़ का था। एसआईटी अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। इसमें दस से ज्यादा पीसीएस अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आई। अब तक दो आईएएस का नाम भी इस मामले में सामने आया। ये दोनों ही अधिकारी मुआवजा घोटाले के वक्त ऊधमसिंह नगर जिले के अधिकारी थे। दोनों का निलंबन हुआ था और अब यह बहाल हो चुके हैं। पिछले तीन साल से इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। सीबीआई जांच के चलते एसआईटी ने जांच धीमी कर दी थी।
एक तरह से यह मामला पिछले तीन साल से ठंडे बस्ते में पड़ा था। लेकिन, हाल के कुछ दिनों में यह मामला फिर से तूल पकड़ रहा है। 31 मार्च को सीबीआई ने एनएचएआई अधिकारी के देहरादून स्थित घर में छापा मारा था। दो दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने इस जांच को लेकर बयान दिया था तो अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत में बयान देकर फिर से हवा दे दी है। धामी ने कहा है कि इस मामले में दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जायेगा। इससे उम्मीद लगाई जा रही है कि एनएच घोटाले का जिन्न एक बार फिर से बाहर आयेगा।
घोटाले में कब क्या हुआ
वर्ष 2017
11 मार्च: एडीएम प्रताप शाह की तहरीर पर रुद्रपुर की सिडकुल चौकी में एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, नजीमाबाद और रुद्रपुर एनएचएआई देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी, कर्मचारी, जसपुर, गदरपुर, खटीमा, किच्छा, रुद्रपुर, बाजपुर और सितारगंज के एसडीएम, एसडीएम कार्यालय में तैनात रीडर, पेशकार, तहसीलदार राजस्व निरीक्षक, खतौनी से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज।
12 मार्च: एसएलओ, उनके कार्यालय में तैनात कर्मचारियों का नाम रिपोर्ट में दर्ज।
3 जून: जसपुर से निलंबित पेशकार विकास चौहान की गिरफ्तारी।
7नवंबर: एसआईटी ने निलंबित एसडीएम भगत सिंह फोनिया, संग्रह अमीन अनिल कुमार, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पलड़िया, रिटायर्ड तहसीलदार भोले लाल, अनुसेवक रामसमुझ, स्टांप वेंडर जीशान और किसान ओमप्रकाश, चरन सिंह को बंदी बनाया गया।
24 नवंबर: घोटाले के मुख्य आरोपी पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह ने एसएसपी के आगे सरेंडर किया, डीपी को जेल भेजा गया।
24 नवंबर: राजस्व अहलमद संजय चौहान, डाटा एंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार गिरफ्तार कर जेल भेजे गए थे।
वर्ष 2018
14 जनवरी: एसआईटी ने पीसीएस अफसर अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह और किसान अमर सिंह को गिरफ्तार किया।
16 जनवरी: सितारगंज से राजस्व अहलमद संतराम गिरफ्तार।
8 फरवरी: एसआईटी ने निलंबित पीसीएस अधिकारी एनएस नगन्याल, चकबंदी अधिकारी अमर सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी गणेश प्रसाद निरंजन को जेल भेजा।
20 मार्च: पुलिस ने गुड़गांव के एक मॉल से एलाइड इंफ्रा की एमडी प्रिया शर्मा और सुधीर चावला को गिरफ्तार किया।
7 जुलाई: बेरीनाग के नायब तहसीलदार रघुवीर सिंह गिरफ्तार कर जेल भेजे गए।
नौ जुलाई: निलंबित पीसीएस अधिकारी तीरथपाल गिरफ्तार कर जेल भेजे गए।
10 जुलाई: एसआईटी ने शासन को जांच रिपोर्ट सौंपी।
11 सिंतबर: शासन ने एसआईटी की जांच आख्या पर आईएएस अफसर डॉ. पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश कुमार यादव को निलंबित कर दिया।
वर्ष 2022
31मार्च 2022- एनएचएआई के एक अधिकारी के देहरादून स्थित आवास पर सीबीआई के छापे।
