ब्रिटेन और भारत
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन के दो दिवसीय भारत दौरे की शुरुआत गुरुवार को अहमदाबाद से हुई। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जानसन का भारत दौरा खास महत्व रखता है। जानसन ने अहमदाबाद में कहा कि भारत और ब्रिटेन दोनों दुनिया में चल रहे तनाव को लेकर चिंतित हैं। दोनों लोकतंत्र हैं और एक साथ रहना …
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन के दो दिवसीय भारत दौरे की शुरुआत गुरुवार को अहमदाबाद से हुई। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जानसन का भारत दौरा खास महत्व रखता है। जानसन ने अहमदाबाद में कहा कि भारत और ब्रिटेन दोनों दुनिया में चल रहे तनाव को लेकर चिंतित हैं। दोनों लोकतंत्र हैं और एक साथ रहना चाहते हैं। यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है।
इसके बावजूद इस मामले पर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करेंगे। माना जा रहा है कि यात्रा हिंद प्रशांत क्षेत्र के हालात पर केन्द्रित रहेगी। पिछले माह ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस ने भारत दौरा किया। अब जानसन का भारत आगमन वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दो लोकतंत्रों के एक साथ मिलकर काम करने के महत्व को रेखांकित करता है।
ट्रस ने कहा था कि भारत एक आर्थिक और तकनीकी का सशक्त स्तंभ है। वह ब्रिटिश निवेशकों को भारत में हरित बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और व्यापार के अवसरों के लिए अग्रणी रूप से अनुमति देने के लिए एक नए मंच की योजना की भी पुष्टि करेंगी।
इससे पहले मई 2021 को ग्लासगो में मुलाकात में बोरिस जानसन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक प्रतिबद्धता व्यक्त की थी कि अगले दशक में ब्रिटेन और भारत के बीच नई व्यापक रणनीतिक साझेदारी और ‘2030 रोडमैप’ दोनों देशों, अर्थव्यवस्थाओं और लोगों को करीब लाएगा।
साथ ही उन क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगा जो दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। दरअसल ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के बाद भारत उसके लिए स्वाभाविक रूप से शीर्ष राजनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं में से एक है। दोनों ही देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में और साथ ही वैश्विक स्तर पर रणनीतिक एवं रक्षा-संबंधी मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए विरासत की समस्याओं को नियंत्रित करने और ठोस संवाद में शामिल होने के प्रति गंभीर हैं।
जानसन की इस यात्रा से मुक्त व्यापार समझौते के प्रस्ताव में तेजी आने, हिंद प्रशात क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा मिलने और रक्षा संबंधों के आगे बढ़ने की संभावना है। आशा है ब्रिटेन भारत के हिंद-प्रशांत महासागर पहल में शामिल होगा और नौवहन सुरक्षा मुद्दों पर एक प्रमुख भागीदार बन जाएगा, दक्षिण पूर्व एशिया में प्रमुख भागीदारों के साथ काम का समन्वय करेगा। ब्रिटेन और भारत के बीच गहरे संबंध हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा को बढ़ावा देंगे और दोनों देशों में रोजगार और अवसर सृजित करेंगे।
