दिनेशपुर: भूजल के लिए खतरा बनी बेमौसमी धान की खेती
केवल चंद्र पाठक, अमृत विचार, दिनेशपुर। किसानों द्वारा अधिक बढ़ाने के खातिर बेमौसमी धान की खेती से भूजल स्तर खिसकने के साथ पानी का संकट गहरा रहा है। जिससे खरीफ की फसल भी प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। फिर भी शासन- प्रशासन बेमौसमी धान की फसल पर रोक नहीं लगा पा रही है। …
केवल चंद्र पाठक, अमृत विचार, दिनेशपुर। किसानों द्वारा अधिक बढ़ाने के खातिर बेमौसमी धान की खेती से भूजल स्तर खिसकने के साथ पानी का संकट गहरा रहा है। जिससे खरीफ की फसल भी प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। फिर भी शासन- प्रशासन बेमौसमी धान की फसल पर रोक नहीं लगा पा रही है। जबकि पंजाब व हरियाणा सरकारों ने गर्मी में बेमौसमी धान की फसल पर रोक लगा रखा है।
जिले के किसान हाईटेक खेती करते हैं। 35 साल पहले क्षेत्र में बंगाली समुदाय के किसानों ने गर्मी में धान की खेती की शुरुआत की थी। तब से जिले के हर क्षेत्र में बेमौसमी धान की खेती की जा रही है। गर्मी में लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में बेमौसमी धान की खेती की जा रही है। जबकि खरीफ की फसल लगभग एक लाख हेक्टेयर एकड़ में फसल उगाई जाती है।
बेमौसमी धान की फसल में 70 से 80 दिन तक पानी लगातार तैयार दिया जाता है। गर्मी का बेमौसमी धान किसानों को 70 से 80 कुंतल प्रति हेक्टेयर की पैदावार देता है। जबकि खरीफ में धान की पैदावार 45 से 50 कुंतल प्रति हेक्टेयर होती है। जिले में बेमौसमी में धान की खेती जल के दोहन से भूजल स्तर नीचे खिसक रहा है। कृषि अधिकारियों का बताना है कि गर्मी में बेमौसमी धान की फसल लेने से खरीफ की धान की फसल 4 से 5 कुंतल प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम हो जाता है।
वहीं भूमि की उत्पादन शक्ति भी कम होने के रोगों व कीटों का प्रकोप बढ़ता है। जबकि गर्मी के धानों में कीट (कीड़े) व रोग कम लगते हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्मी के मौसम में बेमौसम धान के वैकल्पिक के तौर पर किसानों को सूरजमुखी, मैथा व गन्ने की फसल की खेती करनी चाहिए। उनका मानना है कि इन फसलों से आय तो कम होती है।
लेकिन भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ती है। सूत्र बताते हैं कि सिडकुल की स्थापना के बाद रुद्रपुर व सितारगंज में लगे छोटे-बड़े उद्योगों में लाखों लीटर पानी का दोहन हो रहा है। इससे भविष्य में भूजल जल स्तर नीचे जा सकता है। वर्षा के पानी का संरक्षण की समुचित व्यवस्था न होने से बरसात का पानी नालों व नदियों में बह कर बर्बाद हो रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक बेमौसमी धान की खेती से आने वाले कुछ सालों में तराई में पानी का संकट गहरा सकता है। भूजल स्तर बनाए रखने को पंजाब व हरियाणा सरकार ने बेमौसमी धान की खेती पर रोक लगा रखी है।
दिनेशपुर। जिला मुख्य कृषि अधिकारी एके वर्मा ने कहा जिले के किसान वैज्ञानिक ढंग से खेती करते हैं। किसानों द्वारा बेमौसमी धान की फसल की पैदावार कर कम खर्च में अधिक उत्पादन कर आय के स्रोत बढ़ाने के लिए बेमौसमी धान की खेती कर रहे है।
