नैनीताल: हाईकोर्ट ने लगायी नंधौर में माइनिंग के दोहन पर रोक

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नैनीताल, अमृत विचार। हाईकोर्ट ने नंधौर इको सेंसेटिव वन क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा बाढ़ राहत योजना के तहत माइनिंग की अनुमति देने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद बाढ़ राहत कार्य के तहत नदी …

नैनीताल, अमृत विचार। हाईकोर्ट ने नंधौर इको सेंसेटिव वन क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा बाढ़ राहत योजना के तहत माइनिंग की अनुमति देने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद बाढ़ राहत कार्य के तहत नदी से निकलने वाले माइनिंग के दोहन पर रोक लगा दी है, साथ ही बाढ़ राहत कार्य को जारी रखने का आदेश दिया है। पिछली सुनवाई में खंडपीठ ने केंद्र एवं राज्य सरकार सहित वन विभाग से एक सप्ताह में माइनिंग पॉलिसी के मुख्य दिशा-निर्देश स्पष्ट करने को कहा था।

मामले के अनुसार, चोरगलिया निवासी दिनेश कुमार चंदोला ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कहा कि हल्द्वानी का नंधौर क्षेत्र इको सेंसेटिव जोन में आता है। इस क्षेत्र में सरकार ने बाढ़ से बचाव के कार्यक्रम के नाम पर माइनिंग करने की अनुमति दे रखी है। इसका फायदा उठाते हुए खनन कंपनी द्वारा मानकों के विपरीत खनन किया जा रहा है।

एकत्रित पदार्थ को क्रशर के लिए ले जाया जा रहा है जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। याचिका में कहा गया कि इको सेंसेटिव जोन में खनन की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि यह पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व इको सेंसेटिव जोन की नियमावली के विरुद्ध है और इस पर रोक लगाई जाए। जनहित याचिका में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन, डायरेक्टर नंधौर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, डीएफओ हल्द्वानी, उत्तराखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, रीजनल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व एसपीएस इंफ्रा इंजीनियर लिमिटेड नोएडा को पक्षकार बनाया गया है।

 

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