हल्द्वानी: नर्क से बदतर नशा मुक्ति केंद्रों पर किसी का नहीं नियंत्रण
भूपेश कन्नौजिया, हल्द्वानी। शहर में पिछले कुछ सालों से जगह-जगह नशा मुक्ति केंद्रों की बाढ़ आ गई है। यहां के संचालक दावे करते हैं कि नशे की लत वालों को यहां भर्ती करवाए जाने के बाद कुछ समय के बाद उनका नशा छुड़वा दिया जाएगा। स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे गंभीर मसले के बावजूद इन केंद्रों …
भूपेश कन्नौजिया, हल्द्वानी। शहर में पिछले कुछ सालों से जगह-जगह नशा मुक्ति केंद्रों की बाढ़ आ गई है। यहां के संचालक दावे करते हैं कि नशे की लत वालों को यहां भर्ती करवाए जाने के बाद कुछ समय के बाद उनका नशा छुड़वा दिया जाएगा। स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे गंभीर मसले के बावजूद इन केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है।
जांच में पता चला कि शहर में समाज कल्याण विभाग के पास इन केंद्रों की निगरानी का जिम्मा होता है। लेकिन समाज कल्याण विभाग की ओर से बताया गया कि शहर में केवल एक नशा मुक्ति केंद्र से उसका संबंध है। बाकी सब किसके नियंत्रण में हैं इसकी जानकारी नहीं है। हमारी जांच में यह भी पता चला कि बिना किसी नियमों के चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार के नाम पर केवल मामूली दवाएं खिलाई जा रहीं हैं। दरअसल लोग अपने चहेतों की नशे की आदत छुड़ाने के लिए नशा उन्मूलन केंद्र की ओर रूख करते हैं मगर उन्हें यह नहीं मालूम की उनकी जेब काट संचालक चांदी काटते हैं।
हमने एक मरीज को भर्ती कराने के नाम पर शहर के एक नहीं बल्कि पूरे चार नशा मुक्ति केंद्रों की पड़ताल की तो सामने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यहां घुसते ही आपकी जेब टटोली जाती है, अलग-अलग पैकेज तय हैं। जो भी पैकेज लेंगे उनमें एक महीने का एडवांस जमा करना होगा। बढ़िया खाने का अलग से पैकेज लेंगे तो उसका अलग चार्ज है। खैर जब मरीज को भर्ती कराने के बहाने हमने शहर के तमाम नशा मुक्ति सेंटरों का दौरा किया तो यहां का हाल देख आंखे फटी की फटी रह गयीं। यहां बिस्तर पर पड़ा गद्दा और चादर इतनी मैली की मानों बरसों से धुली ही न हों, शौचालय में पसरी गंदगी और गंदी पड़ी रसोई देखकर यहां आपको साक्षात नर्क नजर आएगा।
विवादों में रहे हैं नशा मुक्ति केंद्र
हल्द्वानी। इन केंद्रों में इलाज के नाम पर यहां भर्ती रोगियों से मारपीट होने व कुछ घटनाओं में भर्ती रोगी के जान तक गवाने की घटनाएं पूर्व में प्रकाश में आ चुकी हैं। इसके बाद भी प्रशासन व संबंधित स्वास्थ्य विभाग इन केंद्रों के क्रियाकलापों पर आंखें मूंदे बैठा है। प्रशासन और संबंधित विभाग ने इन केंद्रों की जांच किए जाने की जहमत तक उठाना मुनासिब नहीं समझा। हमारे पास एक ऑडियो क्लिप मौजूद है जिसमें खुद नशा मुक्ति सेंटर में कार्यरत कर्मी यह बता रहा है कि किस तरह संचालक यहां भर्ती मरीजों के तीमारदारों से मोटी रकम ऐंठ रहे हैं। पूर्व में एक नशा मुक्ति केंद्र से बाहर आए युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसके परिवार से मोटी रकम वसूली गयी मगर खाने के नाम पर केवल चावल और पानी वाली दाल ही दी जाती है, न खाने पर पीटा जाता है। वहीं जबरन नशे की दवाई तक दी जाती है। भर्ती के वक्त रूटीन चेकअप की बात हर हफ्ते कही गयी थी मगर दो माह बीत जाने के बाद सुशीला तिवारी अस्पताल से एक महिला मानसिक रोगी स्पेशलिस्ट को बुलाया गया।
30 हजार तक की वसूली और इलाज के नाम पर खानापूर्ति
हल्द्वानी। पड़ताल में पता चला कि पंद्रह से तीस हजार रुपए का मासिक शुल्क वसूलने वाले सेंटर यहां इलाज के नाम पर मरीज को चंद गोलियां खिला रहे हैं। यही नहीं यहां भर्ती मरीजों से ही साफ-सफाई से लेकर खना पकवाया जाता है साथ ही इन केंद्रों में भर्ती नाबालिग बच्चों को भी काम पर रखा गया है।
जिम्मेदारों ने बताया चौंकाने वाला सच
हल्द्वानी। सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी ने बताया कि हमने पूर्व में भी समाज कल्याण विभाग से नशा मुक्ति केंद्रों की सूची मांगी थी लेकिन यह आज तक उपल्बध नहीं हुई है। हालांकि हमारी जांच की निगरानी में यह केंद्र नहीं आते हैं। अगर विभाग की ओर से आदेश होते हैं तो हम इन केंद्रों में जाकर जांच करेंगे। इधर जब समाज कल्याण विभाग जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने बताया कि हल्द्वानी में केंद्र पोषित एक ही नशा मुक्ति केंद्र संचालित है। यह हीरानगर में हैं। बाकी किसी भी नशा मुक्ति केंद्र की जानकारी हमारे पास नहीं है। हम नियमों के तहत बाध्य हैं। अन्य शहरों में भी यही हाल हैं।
