उत्तराखंड: गुरुदेव टैगोर की कर्मभूमि रामगढ़ में विश्व भारती केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम परिसर का भूमि पूजन
हल्द्वानी, अमृत विचार। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 161वीं जयंती के अवसर पर रविंद्र जन्मोत्सव-2022 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पत्नी गीता धामी के साथ शिरकत की। शान्ति निकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मल्ला रामगढ़ से टैगोर टॉप तक सांस्कृतिक …
हल्द्वानी, अमृत विचार। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 161वीं जयंती के अवसर पर रविंद्र जन्मोत्सव-2022 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पत्नी गीता धामी के साथ शिरकत की। शान्ति निकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मल्ला रामगढ़ से टैगोर टॉप तक सांस्कृतिक कलश यात्रा निकाली गई।
कार्यक्रम में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामगढ़ के विद्यार्थियों ने कुमाऊंनी परिधानों में सजकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। देवभूमि सांस्कृतिक दल की ओर से मनमोहक छोलिया नृत्य की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बंगाल समेत देश के विभिन्न क्षेत्रों से शिक्षाविद, साहित्यकार मौजूद रहे। कार्यक्रम में गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर के विचार-दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वार्षिक स्मारिका रवींद्र सृजनिका का विमोचन किया गया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने रामगढ़ विश्व भारती केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम परिसर का भी भूमि पूजन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा 45 एकड़ भूमि में विश्व भारती केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर की स्थापना की औपचारिकता पूरी कर ली गई है। विश्व भारती की स्थापना के लिए प्रथम चरण में 150 करोड़ रूपये की डीपीआर केन्द्र सरकार में स्वीकृति की प्रक्रिया में है।
बताते चलें कि रामगढ़ क्षेत्र के टैगोर टॉप स्थित गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की कर्मस्थली जहां उन्होंने 1901 से 1904 के बीच कई बार आकर अपनी चर्चित कविता संग्रह शिशु समेत गीतांजलि के कुछ भागों की रचना की। जिसके लिए उन्हें 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला जो किसी एशियाई को पहला नोबेल पुरस्कार था।

बताते चलें कि फल पट्टी के रूप में मशहूर रामगढ़ की बेहतरीन आबोहवा के चलते 1903 में विश्वकवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर अपनी बेटी के स्वास्थ्य लाभ के लिए उत्तराखंड आए थे। यहां की मनोरम प्राकृतिक छटा से आकर्षित होकर टैगोर ने रामगढ़ में बसने का मन बनाया। गुरुदेव पहली दफा रामगढ़ में अपने मित्र डैनियल के मेहमान बनकर रामगढ़ आये। खंडहर में तब्दील हो चुके इस बंगले को स्थानीय लोग आज भी शीशमहल के नाम से जानते हैं। बाद में टैगोर ने रामगढ़ में खुद का बंगला बनवाया, जिसके खंडहर आज भी मौजूद हैं। इस जगह को टैगोर टॉप के नाम से जाना जाता है।

जानकार बताते हैं कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर शांति निकेतन की स्थापना रामगढ़ में ही करना चाहते थे लेकिन बेटी और बाद में पत्नी के असामयिक निधन के बाद वे निराश होकर यहां से चले गए। ऐसे में विश्व भारती केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर की स्थापना होने के बाद उम्मीद है कि गुरुदेव की कर्मभूमि से जुड़ी यादों को संजोने और देश-दुनिया तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। विश्व भारती केंद्रीय विश्वविद्यालय उत्तराखंड को भारत के प्रमुख शिक्षा केन्द्र के रूप में स्थापित होने का अवसर मिलेगा वहीं स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नये अवसर उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही यह परिसर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटकों एवं शोधार्थियों को भी राह दिखाएगा।
इस अवसर प्रो. विदयुत चक्रवर्ती, कुलपति विश्वभारती पश्चिम बंगाल, प्रो. अतुल जोशी, डॉ. एसडी तिवारी, विधायक भीमताल राम सिंह कैड़ा, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति एनके जोशी, डीएम धीराज सिह गर्ब्याल, एसएसपी पंकज भट्ट, ब्लॉक प्रमुख धारी आशा रानी, संस्कृतिकर्मी गौरी शंकर कांडपाल आदि रहे।
