बरेली: आगजनी के बीच बीडीए ने खाली कराई 75 करोड़ की जमीन

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। हंगामे और विवाद के बीच बरेली विकास प्राधिकरण ने सोमवार को रामगंगा नगर की काफी जमीन खाली करा ली। कब्जेदारों से जमीन खाली कराने के दौरान बीडीए की टीम एक दर्जन जेसीबी, एक प्लाटून पीएसी व भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंची थी। फिर भी शरारती तत्वों ने टीम को हतोत्साहित …

अमृत विचार, बरेली। हंगामे और विवाद के बीच बरेली विकास प्राधिकरण ने सोमवार को रामगंगा नगर की काफी जमीन खाली करा ली। कब्जेदारों से जमीन खाली कराने के दौरान बीडीए की टीम एक दर्जन जेसीबी, एक प्लाटून पीएसी व भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंची थी। फिर भी शरारती तत्वों ने टीम को हतोत्साहित करने का प्रयास किया लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।

कार्रवाई के दौरान एक युवक ने घर के छप्पर में आग लगाकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया। दमकल ने उसे बुझा दिया। इससे पहले युवकों ने पथराव करने के लिए पत्थर भी उठाए, पुलिस सक्रिय हुई तो वे भागे। उसी दौरान भीड़ से आए पत्थर से बीडीए के जेई चोटिल हो गए। इन अवरोधों को पार करते हुए टीम ने मिशन पूरा किया। 26 कब्जेदारों से जमीन को मुक्त करा लिया। इस कीमत लगभग 75 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

बीडीए सचिव योगेन्द्र कुमार के नेतृत्व में टीम ने अभियान शुरू करना चाहा तो विरोध शुरू हो गया। टीम ने संयम नहीं छोड़ा और ग्रामीणों को समझाती रही कि सरकारी कार्य में बाधा न डाले। इसी दौरान भीड़ से किसी ने एक पत्थर उछाला, जो जेई के सिर में लगा। इसके बाद फोर्स ने आगे बढ़कर लाठियां फटकारीं तो भीड़ तितर बितर हो गई। पीएसी और पुलिस सक्रिय हुई तो सभी शांत हो गए। बीडीए की जेसीबी कब्जों पर गरजने लगीं।अवैध बने पक्के 26 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया।

बीच बीच में महिलाएं अफसरों के सामने जमीन खाली करने के लिए मोहलत देने की मांग करने पहुंचीं, लेकिन अफसरों ने पर्याप्त समय देने की बात कहकर उनकी बात को नकार दिया। हालांकि, शाम पांच बजे टीम कुछ कब्जेदारों को जमीन खाली करने के लिए दो दिन की मोहलत देकर लौट आई। सचिव योगेन्द्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2004 में रामगंगा नगर योजना के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया था। उसी भूमि पर कई लोग पक्के मकान बनाकर रह रहे थे।

बीडीए ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अवैध कब्जेदारों को रियायती दरों पर प्राधिकरण के प्लाट प्राप्त करने और बिना डाउन पेमेंट के 10 वर्षों में भुगतान करने की सुविधा भी प्रदान की। कई लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है। साथ ही जो लोग प्लाट लेने के इच्छुक नहीं थे, उनसे बार-बार अनुरोध किया जा रहा था कि अपनी वैकल्पिक व्यवस्था कर लें, लेकिन वे प्राधिकरण के आग्रह को भी नहीं मान रहे थे। इस पर यह कार्रवाई की गई है।

उन्होंने बताया कि कब्जों के कारण पूर्ण भुगतान के बाद भी बड़े पैमाने पर आवंटियों को कब्जा नहीं दिया जा पा रहा था। टीम में अधीक्षण अभियंता राजीव दीक्षित, अधिशासी अभियंता आशु मित्तल, सहायक अभियन्ता, प्रमोद कुमार गुप्ता, आरकेचौधरी, अनिल कुमार, अवर अभियंता आदि शामिल रहे। टीम के साथ थाना बिथरी चैनपुर पुलिस व पीएसी के जवान भी रहे।

जोगिन्दर सिंह, वीसी बीडीए
गांव में बने विद्यालय को तोड़कर बीडीए सवा करोड़ की लागत से मॉडल स्कूल बनवाएगा। इसमें स्मार्ट क्लासेस लगेगी। प्रोजेक्टर से बच्चे पढ़ाई करेंगे। कब्जा हटने के बाद रामगंगा नगर योजना की ब्रह्मपुत्र, साबरमती योजना के लिए 24 मीटर रास्ता हो गया है। कब्जा हटाने में कुछ शरारती तत्वों ने माहौल बिगाड़ने का काम किया, लेकिन उनके मंसूबे सफल नहीं हो पाए। प्राधिकरण की कब्जे के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जाएगी रहेगी।

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