मुरादाबाद : 200 रुपये में एक महीने दौड़ रही सिपाही की मैजिक बाइक
श्रीशचंद्र मिश्र/अमृत विचार। यूपी पुलिस के बीट आरक्षी जिस बाइक पर सवार होकर फर्राटा भरते देखे जाते हैं, वह जादुई है। पेट्रोल जब 100 रुपये प्रति लीटर के भी पार है, तब भी 200 रुपये में एक महीने बाइक से फर्राटा भरने की कला किसी जादू से कम नहीं है। तकनीकी दृष्टि से दावा भले …
श्रीशचंद्र मिश्र/अमृत विचार। यूपी पुलिस के बीट आरक्षी जिस बाइक पर सवार होकर फर्राटा भरते देखे जाते हैं, वह जादुई है। पेट्रोल जब 100 रुपये प्रति लीटर के भी पार है, तब भी 200 रुपये में एक महीने बाइक से फर्राटा भरने की कला किसी जादू से कम नहीं है। तकनीकी दृष्टि से दावा भले ही अविश्वसनीय हो, मगर पुलिस के कागज का सच यही है। वाहन भत्ता के रूप में एक बीट पुलिस ऑफिसर (बीपीओ) को महकमे से महज 200 रुपये ही प्राप्त होते हैं।
आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में पुलिस महकमे ने चौंकाने वाली जानकारी दी है। मुख्य आरक्षी व आरक्षी का वाहन भत्ता प्रति माह महज 200 रुपये है। वाहन भत्ते के रूप में एक दरोगा को महज 700 रुपये ही प्राप्त होते हैं। ऐसे में सवाल लाजमी है कि दायित्वों के भारी बोझ तले दबे दरोगा व सिपाही इतने कम वाहन भत्ते में विभाग की बड़ी उम्मीदों को कैसे पूरा करते हैं। एक सिपाही का कहना है कि महज सात सौ रुपये में पूरे महीने बाइक से भ्रमण असंभव है।
रिस्पांस टाइम चेक करने वाले उच्चाधिकारियों के आदेशों की पूर्ति में प्रति महीने एक बाइक पर तीन से साढ़े तीन हजार रुपये तेल के रूप में व्यय होता है। एक बीट पुलिस अफसर 107/16 की कार्रवाई, इलाके के संभ्रांत लोगों से मिलना, व्हट्सएप ग्रुप बनाना, घटना स्थल का निरीक्षण आदि काम करता है। कुछ वर्षों में सिपाहियों के काम तो बढ़े, लेकिन साइकिल भत्ते से ही वह गांव व गलियों की खाक छान रहे हैं। व्यावहारिक रूप से सिपाही बाइक चलाता है। साइकिल से दायित्व निर्वहन संभव ही नहीं है। बाइक चलाने का खर्च एक बीट आरक्षी कैसे उठाता है, इसे समझना राकेट साइंस नहीं है। बाइक से ड्यूटी पूरी करने के खर्च का वहन सिपाही खुद करता है। सिपाही कई वर्षों से वाहन भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी गुहार अनसुनी है।
साहब से ज्यादा सिपाही को पौष्टिक आहार भत्ता
पौष्टिक आहर भत्ते को लेकर शासन ने सिपाही व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ संवेदनशीलता बरती है। राजपत्रित अधिकारी को पौष्टिक आहार भत्ते के रूप में महज 800 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। जबकि निरीक्षक व उपनिरीक्षक को यह भत्ता 1,500 के रूप में प्राप्त होता है। भत्ते के रूप में हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल को मिलने वाली धनराशि 1,875 रुपये है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों यानी कि फालोवर को 1,650 रुपये आहार भत्ता मिलता है।
पांच रुपये का नाश्ता व 25 रुपये में खाना
100 से 200 रुपये के होटल के खाने से आपका पेट भले न भरे, लेकिन पुलिस पांच रुपये के नाश्ते व 25 रुपये के खाने से हर बंदी को संतुष्ट कर देती है। पुलिस कस्टडी में रहने वाले बंदियों को पांच रुपये का नाश्ता व 25 रुपये में खाना मुहैया करा दिया जाता है। 2017 में मुरादाबाद पुलिस ने 21,490 रुपये, 2018 में 24,585 रुपये, 2019 में 31,190 रुपये, 2020 में 25,193 रुपये व 2021 में 18,942 रुपये बंदियों के नाश्ते व भोजन पर व्यय किया। याद रहे वर्ष 20-21 में कोरोना महामारी का दौर रहा। दो वर्षों में सबसे अधिक बंदी पुलिस ने जेल भेजे।
ये भी पढ़ें : निपेंद्र हत्याकांड : पर्दाफाश का खाका तैयार, पुलिस अभी भी कर रही है साक्ष्यों की तलाश
