बरेली: कच्ची सड़कें, पटा तालाब, महेशपुर ठाकुरान मांगे विकास
अमृत विचार, बरेली। गांवों को शहरों की तर्ज पर विकसित करने के लिए राज्य सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है। ग्रामीणों को समस्या निराकरण के लिए तहसील, कलेक्ट्रेट या अन्य विभागों के दफ्तरों में नहीं आना पड़े, इसके लिए मिनी सचिवालय बनवाए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो …
अमृत विचार, बरेली। गांवों को शहरों की तर्ज पर विकसित करने के लिए राज्य सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है। ग्रामीणों को समस्या निराकरण के लिए तहसील, कलेक्ट्रेट या अन्य विभागों के दफ्तरों में नहीं आना पड़े, इसके लिए मिनी सचिवालय बनवाए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर दूर क्यारा विकासखंड की महेशपुर ठाकुरान ग्राम पंचायत मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
5 हजार की आबादी वाली इस पंचायत में आने-जाने के लिए संपर्क मार्ग तो हैं, लेकिन उनकी हालत जर्जर है। प्राथमिक और जूनियर विद्यालय के साथ पंचायत भवन बना है, मगर पंचायत भवन कब खुलता है, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का दंश झेल रही पंचायत विकास से कोसों दूर है। जिम्मेदारों की उदासीनता से पात्रों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। गांव में समस्याओं का अंबार है। सड़कें कच्ची हैं, तालाब गंदगी से अटे हैं, कई शौचालयों के दरवाजे गायब हैं। उनका उपयोग नहीं हो रहा है। बदायूं रोड पर पहुंचने के लिए मुख्य संपर्क तक जर्जर अवस्था में है।
करीब पांच मीटर तक खड़ंजा पड़ा हुआ है। बारिश में गांव में जलभराव हो जाता है। 4-5 सीसी रोड बनी हुई हैं। महेशपुर ठाकुरान की बुजुर्ग रामकली का कहना है कि 15 साल से ग्रामसभा की जमीन पर झोपड़ी बनाकर रह रही हैं। उनका पुत्र मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करता है। उनके साथ पुत्रवधू भी रहती है। कई बार प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन किया, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला। इस संबंध में ग्राम प्रधान रामरती का कहना है कि रामकली किसी दूसरे शहर की रहने वाली हैं। वह परिवार सहित यहां रहने लगी हैं।
ये भी पढ़ें- बरेली: पंप खराब होने से आजाद नगर में पानी खरीद कर पी रहे हैं लोग
