अयोध्या: सरयू नदी में छोड़ी गईं विभिन्न प्रजाति की दो लाख मछलियां, जीविका सुधारने के लिए 25 मछुआरों को दी किट

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अयोध्या। गुप्ताघाट स्थित सरयू नदी में मंगलवार को 6 से भी अधिक प्रजाति की दो लाख मछलियों को छोड़ा गया। यह पहला मौका था जब सिफरी ने इतनी अधिक तादात में मछली के बच्चे डाले हैं। इससे न सिर्फ मछलियों का नदी में पुनर्स्थापन होगा बल्कि मत्स्य और मात्स्यिकी में गुणात्मक परिवर्तन भी आएगा। साथ …

अयोध्या। गुप्ताघाट स्थित सरयू नदी में मंगलवार को 6 से भी अधिक प्रजाति की दो लाख मछलियों को छोड़ा गया। यह पहला मौका था जब सिफरी ने इतनी अधिक तादात में मछली के बच्चे डाले हैं। इससे न सिर्फ मछलियों का नदी में पुनर्स्थापन होगा बल्कि मत्स्य और मात्स्यिकी में गुणात्मक परिवर्तन भी आएगा।

साथ ही नदी की स्वच्छता भी बनी रहेगी। सरयू में डाले गए मछली के बीज गंगा नदी से पकड़ी गईं मछलियों के हैं। साथ ही जीविका में सुधार लाने के लिए 25 मछुआरों को कास्ट नेट व जाल भी दिया गया। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अंतर्गत सरयू नदी में मछलियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए केंद्रीय अन्तरस्थलीय मत्स्कीय अनुसंधान संस्थान सिफरी की तरफ से गुप्तारघाट में जन जागरुकता सह रैंचिंग कार्यक्रम आयोजन किया। इस दौरान शिफरी के निदेशक डॉ. वीके दास, अध्यक्ष डीएम नितिश कुमार विशिष्ट अतिथि और विधायक वेद प्रकाश गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

संस्थान के निदेशक व परियोजना के मुख्य अन्वेषक डॉ. बीके दास ने प्रमुख उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम की शुरुआत सन् 2018 से ही हो गई थी, जिसके तहत लगभग 45 लाख से ज्यादा रोहू, कतला, कलबासु और मृगाल/नैनी मत्स्य प्रजातियों के फिंगरलिंग/अंगुलिका के बीज कई राज्यों से गुजरने वाली गंगा नदी में छोड़ा जा चुकी हैं। नमामी गंगे परियोजना के तहत 14 मई से कई विभिन्न कार्यक्रम जैसे मत्स्य बीज को गंगा नदी में छोड़ना, डॉल्फिन व जल संरक्षण और जन जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

गुप्तार घाट स्थित सरयू नदी में रोहू, कतला, कलबासु, मृगाल/नैनी और महासीर को डाला गया है। रोहू, कलबासु और मृगाल/नैनी जैसी मछलियां न केवल नदी के स्टॉक में वृद्धि करेंगी बल्कि नदी की स्वच्छता को बनाए रखने में भी मदद करेंगी।

कार्यक्रम में आस-पास गांव के मत्स्य पालक, मत्स्य व्यवसायी व नदी तट पर रहने वाले स्थानीय लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में संस्थान के केंद्राध्यक्ष डॉ. डीएन झा ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया। डॉ. वेंकटेश ठाकुर, वैज्ञानिक ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए आस्वस्त किया।

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