लखनऊ: राशनकार्डों का हुआ सत्यापन तो फंस सकते हैं निरीक्षक और लेखपाल, 25 फीसदी हो सकते हैं निरस्त
लखनऊ। अपात्रों के राशनकार्ड कैसे बन गए यह गंभीर विषय है। इसमें आपूर्ति विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। राशनकार्डों के सत्यापन में कार्डधारकों के साथ विभाग के पूर्ति निरीक्षक और लेखपाल भी फंस सकते हैं। राशनकार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक की रिपोर्ट लगने के बाद ही नए राशनकार्ड जारी …
लखनऊ। अपात्रों के राशनकार्ड कैसे बन गए यह गंभीर विषय है। इसमें आपूर्ति विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। राशनकार्डों के सत्यापन में कार्डधारकों के साथ विभाग के पूर्ति निरीक्षक और लेखपाल भी फंस सकते हैं। राशनकार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक की रिपोर्ट लगने के बाद ही नए राशनकार्ड जारी होते हैं।
पिछले दो वर्षों से राशनकार्ड बनवाने के लिए तहसील से जारी आय प्रमाण भी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। आय प्रमाण पत्र क्षेत्रीय लेखपाल की रिपोर्ट के बाद तहसील से जारी किये जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि राशनकार्ड बनाने के लिए पूर्ति निरीक्षक से लेकर लेखपाल मौके पर न जाकर कार्यालय में ही बैठकर रिपोर्ट लगा देते हैं। यदि विभाग द्वारा कार्डधारकों का सत्यापन कराया जाता है तो 25 प्रतिशत से अधिक राशनकार्ड निरस्त हो जायेंगे।
नए राशनकार्ड बनवाने की यह है प्रक्रिया
नया राशनकार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन जिलापूर्ति अधिकारी की लॉग इन से संबंधित क्षेत्र के पूर्ति निरीक्षक को अनुमोदित किया जाता है। निरीक्षक जांच करके पात्र होने पर डिजिटल सिग्नेचर कर राशनकार्ड जारी कर देता है। अपात्र पाये जाने पर आवेदन निरस्त कर देता है।
लॉकडाउन और चुनाव से पहले जारी हुए राशनकार्ड
2020 में कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के दौरान विभाग ने जमकर राशनकार्ड जारी किए। इस दौरान जारी राशनकार्डों का आपूर्ति विभाग के पूर्ति निरीक्षकों ने सत्यापन तक नहीं किया। इसके अलावा विधानसभा चुनाव 2022 से पहले भी खूब राशनकार्ड जारी हुए। चुनाव नजदीक आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों के राशनकार्ड बनवाए।
प्रदेश में राशन कार्डधारकों की संख्या
- अंत्योदय कार्डधारक 40,94,500
- पात्र गृहस्थी कार्डधारक 3.62 करोड़
- लखनऊ में अन्त्योदय कार्डधारक 50,112
- पात्र गृहस्थी कार्डधारक 7,34,530
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