यूनिकॉर्न का शतक
देश-दुनिया में नए-नए स्टार्टअप शुरू हो रहे हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा कि वैश्विक महामारी के इस दौर में भी भारतीय स्टार्टअप वैल्थ (संपदा) और वैल्यू (मूल्य) का सृजन कर रहे हैं। देश में यूनीकॉर्न की संख्या 100 के पार चली गई है। जब किसी स्टार्टअप की …
देश-दुनिया में नए-नए स्टार्टअप शुरू हो रहे हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा कि वैश्विक महामारी के इस दौर में भी भारतीय स्टार्टअप वैल्थ (संपदा) और वैल्यू (मूल्य) का सृजन कर रहे हैं। देश में यूनीकॉर्न की संख्या 100 के पार चली गई है। जब किसी स्टार्टअप की बाजार में कीमत बढ़कर 7500 करोड़ रुपए हो जाती है तो उसे यूनिकॉर्न कहा जाता है। वर्ष 2013 में पूंजीपति उद्यमी एलन ली ने स्टार्टअप के लिए यूनीकॉर्न शब्द को चर्चित किया था।
इन यूनीकॉर्न का कुल मूल्य 25 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है। कुल यूनीकॉर्न में से 44 पिछले साल ही बने थे। इस वर्ष के चार माह में ही 14 और नए यूनीकॉर्न बन गए। भारत इस क्षेत्र में अमेरिका और चीन को भी मात दे रहा है। निश्चित रुप से यह गर्व की बात है और युवाओं की सामर्थ्य के प्रति एक नया विश्वास जगाती है। भारत में बढ़ती नवाचार संस्कृति का प्रमाण है कि अब युवा नौकरी के बजाय अपने व्यापार के नवीन विचार को साकार करने में जुटे हैं। देश के प्रमुख यूनिकॉर्न में पेटीएम, जोमैटो, स्नैपडील, फ्लिपकार्ट, नाइका आदि का नाम शामिल है। यानि जिसके पास अभिनव विचार हैं, वो बड़े पैमाने पर धन सृजन कर सकते हैं।
देश में बढ़ते यूनिकॉर्न से एक बात साफ है कि इससे घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आ रहा है। साथ ही भारत में निवेश को भी बढ़ावा मिल रहा है। स्टार्टअप के साथ युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है। ये स्टार्टअप देश के लोगों की दिनचर्या पर बड़ा असर डाल रहे हैं और इनकी मदद से लोगों का जीवन स्तर भी सुधर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले वर्षों में इस संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। साल 2025 तक यूनिकॉर्न की संख्या 100 से बढ़कर 200 तक पहुंच सकती है।
साथ ही स्टार्टअप की कुल संख्या बढ़कर एक लाख हो जाएगी और इन स्टार्टअप से करीब 35 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके लिए देश की युवा-शक्ति, प्रतिभा और सरकार सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। स्टार्टअप के लिए पूरे देश में समर्थन प्रणाली विकसित करनी होगी। दक्षिण और पूर्वी-भारत के 75 से अधिक जिलों से जुड़े 9000 से अधिक ग्रामीण उद्यमी ग्रामीण उपभोक्ताओं को अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। आज हमारे बीच प्रेरकों की कमी नहीं है, उनकी मदद से अधिक से अधिक ग्रामीण युवाओं को भी इस क्षेत्र में उतरने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।
