संभल: ट्रांसफार्मर में लगी आग की चपेट में आया अस्पताल, मची अफरा-तफरी
संभल/चन्दौसी, अमृत विचार। आजाद रोड स्थित बीएस हास्पिटल एंड हार्ट सेंटर से सटकर लगे ट्रांसफार्मर में शुक्रवार की दोपहर आग लग गई। आग ने अस्पताल को चपेट में लिया, जिसके कारण अस्पताल का मेडिकल स्टोर खाक हो गया। अस्पताल का आगे का हिस्सा भी पूरी तरह से जल गया। आग लगने से करीब 20 लाख …
संभल/चन्दौसी, अमृत विचार। आजाद रोड स्थित बीएस हास्पिटल एंड हार्ट सेंटर से सटकर लगे ट्रांसफार्मर में शुक्रवार की दोपहर आग लग गई। आग ने अस्पताल को चपेट में लिया, जिसके कारण अस्पताल का मेडिकल स्टोर खाक हो गया। अस्पताल का आगे का हिस्सा भी पूरी तरह से जल गया। आग लगने से करीब 20 लाख का नुकसान बताया जा रहा है। मौके पर अग्निशमन ने पहुंचकर आग पर काबू पाया।
यहां आजाद रोड पर ब्रहम बाजार निवासी डॉ. राकेश चौधरी का बीएस हास्पिटल एंड हार्ट सेंटर है। जहां वह अपने पुत्र के साथ इसका संचालन करते हैं। अस्पताल में विद्युतापूर्ति के लिए एक ट्रांसफार्मर लगा हुआ है। दोपहर करीब 3.30 बजे ट्रांसफार्मर में अचानक आग की लपटें उठने लगीं। जब तक अस्पताल प्रशासन कुछ समझ पाता। यह आग तार से होती मीटर में पहुंच गई और उसने थोड़ी देर में अस्पताल के मेडिकल स्टोर को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद आग पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंच गई। इस दौरान आनन-फानन में अस्पताल से मरीजों और स्टाफ को बाहर निकाला गया। सूचना मिलने पर अग्निशमन दल की दो गाड़ियां वहां पहुंच गईं और आग बुझाने के प्रयास शुरु कर दिए। आग पर करीब साढ़े चार बजे तक पूरी तरह से काबू पा लिया गया।
मेडिकल स्टोर संचालक रोमिल वार्ष्णेय पुत्र स्व. विनोद कुमार ने बताया कि दो लाख की नगदी के अलावा करीब 12 लाख की दवाइयां पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। अचानक हुए हादसे के कारण अस्पताल स्वामी की हालत बिगड़ गई। जबकि उनके पुत्र भी कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे। हालांकि अस्पताल के भवन को करीब चार से पांच लाख का नुकसान हुआ है। पूरे अस्पताल में धुंए के कारण बुरा हाल था, सांस लेने में खासी परेशानी हो रही थी। अग्निशमन कर्मियों को इसी कारण आग बुझाने में काफी परेशानी उठानी पड़ रही थी। अग्निशमन का एक वाहन चन्दौसी स्टेशन व दूसरा बहजोई से बुलाया गया था । इस दौरान उपजिलाधिकारी राजपाल सिंह, सीओ आलोक कुमार सिद्धू, प्रभारी निरीक्षक मुकेश कुमार के अलावा शहर के सभी चिकित्सक व गणमान्य लोग वहां पहुंच गए।
थोड़ी देर हो जाती तो जान-माल का खास नुकसान हो सकता था
गनीमत यह रही कि रेलवे फाटक 36 बी खुला मिला और अग्निशमन दल बिना देरी किए वहां पहुंच गया। जिसने आते ही आग बुझानी शुरु कर दी। हालांकि इसके बाद भी आग अस्पताल के ब्लड बैंक तक पहुंच चुकी थी। अग्निशमन दल की एक टीम ने बाहर तो दूसरी ने भीतर से बुझाई आग। इसलिए ब्लड बैंक बच गया।
दो दिन पहले दिया गया था अस्पताल प्रशासन को नोटिस
अस्पताल प्रशासन ने एनओसी तो ले रखी थी, लेकिन इसका नवीनीकरण नहीं हुआ था। इसीलिए दो पूर्व अग्निशमन के अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर आग बुझाने व बचने के उपायों की जानकारी ली थी। मानक के अनुरुप न मिलने पर अग्निशमन ने नोटिस देकर जबाव मांग था। जबाव देने से पहले ही अस्पताल में हादसा हो गया ।
मरीज अस्पताल से निकलकर जा बैठे सड़क किनारे
जैसे ही अस्पताल में आग लगी। वैसे ही मरीजों ने निकलना शुरु कर दिया था। अस्पताल प्रशासन ने भी मरीजों को बाहर जाकर उनसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचने को कहा। इसमें कुछ मरीज दूसरे अस्पताल में चले गए, जबकि दो मरीज जिनके हाथ में ड्रिप लगी हुई थी वह अस्पताल बाहर कुछ दूरी पर जाकर सड़क किनारे जाकर बैठ गए थे। जिनमें गांव सिमरौआ निवासी भूरे व जनपद बदायूं के गांव पिपरिया निवासी शाकिर शामिल थे। भूरे पेट संबंधी बीमारी का इलाज करा रहा था वहीं शाकिर दिल का रोगी था।
ट्रांसफार्मर में लगी आग ने अस्पताल को चपेट में ले लिया था। समय रहते आग पर काबू पा लिया गया । कोई भी जनहानि नहीं हुई है। आग किन कारणों से लगी और अस्पताल में आग को लेकर मानक की कमी थी या नहीं, इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -प्रताप सिंह ,सीएफओ, संभल।
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