हल्द्वानी: 12 दिन तक आरोपियों को नहीं पकड़ने से पुलिस की किरकिरी

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हल्द्वानी, अमृत विचार। 12 दिन पूर्व मारपीट के आरोपियों को शिकायत दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तार नहीं करना पुलिस को भारी पड़ गया। घायल व्यक्ति ने एसटीएच में उपचार के बाद दम तोड़ दिया। जिसके बाद परिजनों द्वारा हंगामा काटे जाने से पुलिस ने कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। मल्ला गोरखपुर नवाबी रोड निवासी गिरीश …

हल्द्वानी, अमृत विचार। 12 दिन पूर्व मारपीट के आरोपियों को शिकायत दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तार नहीं करना पुलिस को भारी पड़ गया। घायल व्यक्ति ने एसटीएच में उपचार के बाद दम तोड़ दिया। जिसके बाद परिजनों द्वारा हंगामा काटे जाने से पुलिस ने कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

मल्ला गोरखपुर नवाबी रोड निवासी गिरीश चंद्र बेलवाल (45) को 12 दिन पहले दो लोगों ने जमकर पीट दिया था। मृतक के बड़े भाई तारा चंद्र बेलवाल ने बताया नवाबी रोड में उनकी दुकान है। पड़ोस में रहने वाले राकेश गांधी उनके दुकान से 500 रुपये का उधार लेकर गए थे, इसी बीच वह 500 रुपये लेकर आये और गिरीश बेलवाल को देकर चले गए।

बाद में गिरीश को पता चला कि 500 रुपए का नोट नकली है। वह गांधी के घर गए, वहां पर गांधी का बेटा था। जिससे उन्होंने यह बात बताई तो गांधी के बेटा आगबबूला हो गया और लातघूसों से मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद दोनों पिता पुत्र ने गिरीश को इतना पिता की उसका पैर में फैक्चर हो गया। मारपीट में सिर और शरीर में गंभीर चोट आ गई। घायल अवस्था में परिजनों ने अस्पताल में भर्ती किया, लेकिन शुक्रवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।

इधर गिरीश की मौत के बाद अस्पताल में परिजनों ने जमकर हंगामा काटा। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाते हुये कहा कि इस मामले में पुलिस को शिकायत दी गई थी। मुकदमा भी दर्ज हुआ था। इसके बाद भी पुलिस ने 12 दिन तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। परिजनों ने कहा कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता है तब तक वह अस्पताल से मृतक को लेकर नहीं जायेंगे। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस के हाथ पांव फूल गये।

मौके पर पहुंची पुलिस ने गिरीश के परिजनों को समझाने का प्रयास किया। कोतवाल हरेंद्र चौधरी ने आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई का करने आश्वासन दिया। इस दौरान मेयर जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला भी अस्पताल पहुंच गये। मेयर की उपस्थिति में परिजनों ने पुलिस पर फिर से आरोप लगाये। बताया कि एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जल्द ही दूसरे को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा, तब जाकर मामला शांत हुआ। इधर कोतवाल ने बताया कि आरोपियों पर पहले से ही मारपीट का मुकदमा दर्ज था। जिसमें हत्या की भी धारा जोड़ दी गई है।

जबाव नहीं दे पाई पुलिस
जब मेयर सहित अन्य नेता वहां पहुंचे। तो पुलिस इस बात का जबाव नहीं दे पाई कि 12 दिन में भी उसने क्या कार्रवाई की। हालांकि कोतवाल मामले की जांच किये जाने की बात कहकर अपनी सफाई दे रहे थे। इधर मृतक के परिजनों का कहना है कि पुलिस ने कभी भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। आज जब गिरीश की मौत हो गई है तब जाकर पुलिस हरकत में आई है।

500 रुपये के लेनेदेन में चली गई जान
गिरीश की मौत मारपीट में हो गई। उसका आरोपियों के साथ 500 रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद हो गया था। केवल 500 रुपये की वजह से एक व्यक्ति की जान चले जाने की वजह से मामला चर्चाओं में रहा।

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