शाहजहांपुर: रोने-बिलखने की चीखों से दहल उठा भड़ेरी गांव
शाहजहांपुर, अमृत विचार। रविवार की भोर भड़ेरी गांव के लिए मनहूस साबित हुई। जैसे जैसे सूर्य की किरणें चटख होती रहीं, वैसे वैसे महिलाओं का करुण विलाप, बच्चों की बिलखने की चीखें भी बढ़ती गईं। गांव में किसी भी घर के चूल्हे नहीं जले। गांव में पहुंचने वाले अधिकारियों को गाड़ियों के पास इस उम्मीद …
शाहजहांपुर, अमृत विचार। रविवार की भोर भड़ेरी गांव के लिए मनहूस साबित हुई। जैसे जैसे सूर्य की किरणें चटख होती रहीं, वैसे वैसे महिलाओं का करुण विलाप, बच्चों की बिलखने की चीखें भी बढ़ती गईं। गांव में किसी भी घर के चूल्हे नहीं जले। गांव में पहुंचने वाले अधिकारियों को गाड़ियों के पास इस उम्मीद से भीड़ पहुंचती कि कोई खबर पता लगेगी। शाम का सूरज अस्त हो गया, लेकिन किसी भी लाड़ले का शव तक नहीं लाया जा सका। गांव वालों में इस बात को लेकर गुस्सा भी दिखा कि हापुड़ में पुलिस उनके अपनों की लाशों के पास तक नहीं जाने दे रही है।
हालांकि जिले के प्रशासिनक अधिकारी और पुलिस लोगों को यही दिलासा देती नजर आई कि औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शवों को गांव लाया जाएगा। जिस गांव में हमेशा चहल-पहल रहती थी, बच्चे टोलियों में घर के बाहर खेलते रहते थे, महिलाएं घर का काम-काज निपटाकर दरवाजे पर घंटों बतियाती रहती थीं, घरों से जलते चूल्हों का धुआं आसमान की ऊचाइयां नापता दिखता था, ब्लॉक कांट का वह गांव भड़ेरी रविवार को मातम में था। हापुड़ के गांव में अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट से भड़ेरी गांव के ही 10 लोगों की मौत हुई है। इस हादसे ने गांव की खुशियों को पलभर में छीन लिया।
यह वही गांव हैं, जिसके एक साथ दस लोगों की हापुड़ की पटाखा फैक्टरी में शनिवार को हुए धमाके में जान चली गई। मृतकों में अधिकांश युवा हैं, जिनमें कुछ की शादी हो गई, तो कुछ अविवाहित भी थे। सभी मजदूरी करते थे। जैसे ही रविवार सुबह गांव में घटना और उसमें मारे गए लोगों की सूचना गांव पहुंची, तो पूरा गांव स्तब्ध रह गया। पूरे गांव में मातम छा गया। रविवार को घरों में चूल्हे नहीं जले, बच्चे भी सहमे हुए इधर-उधर खामोशी से एक-दूसरे को निहार रहे थे।
घरों से चीखने-चिल्लाने की करुण पुकार आसपास रहने वालों के कानों को चीर रही थी। पूरे दिन दहाड़े मार-मार कर रोते माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी, बच्चों का हाल बहुत खराब हो चुका था। शाम तक आंसू भी इनका साथ छोड़ चुके थे। आंखें सूख चुकी थीं। सभी की नजरें दरवाजे पर टिकी थी, कि कब उनके लाड़लों और चहेतों की सूरत उन्हें दिखाई दे। देर रात तक किसी भी मृतक का शव गांव नहीं पहुंच सका था।
खिलौना बनाने की फैक्टरी के बहाने भेजा, काम दिलाया बारूद का
हापुड़ के धौलाना क्षेत्र में इलेक्ट्रानिक उपकरण बनाने के लाइसेंस पर जिस फैक्टरी में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे थे, उसमें बड़ी संख्या में लोग मजदूरी करते थे। इस फैक्टरी में शाहजहांपुर के भी कई मजदूर काम करते थे। कांट क्षेत्र के गांव भंडेरी के ही अमित नामक एक व्यक्ति अन्य लोगों को खिलौना आदि फैक्टरियों में काम दिलाने की बात कहकर 15 दिन पहले ही अपने साथ बुलाकर ले गया था। महिलाएं-बुजुर्ग रो-रोकर कह रहे हैं कि वह तो जानते थे कि भइया, खिलौना बनाएंगे। ये तो बारूद वाली फैक्टरी निकली।
खाने कमाने गए थे, उन्हें क्या पता था मौत इंतजार कर रही…..
रोने की आवाजों के बीच से यह बात भी पता लगी की यह सभी लोग पहली बार ही शहर से बाहर मजदूरी करने गए थे। उन्हें क्या पता था कि जहां वह रोजी-रोटी की तलाश में जा रहे हैं, वहां मौत उनका इंतजार कर रही है। हापुड़ की इस घटना में भंडेरी गांव के ही 10 लोगों की मौत हुई है। एक गांव के दस लोगों की मौत से पूरा गांव सदमे में है। नाते-रिश्तेदार एक-एक कर गांव में पहुंच रहे हैं, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी गांव में डटे हैं। भीड़ के बावजूद गांव में सन्नाटा पसरा है। सभी एक-दूसरे को ढांढस तो बंधा रहे हैं, लेकिन उन्हें खुद समझ नहीं आ रहा कि ढांढस कैसे रखा जाए।
इस घटना में जान गंवाने वाले 28 वर्षीय प्रेमपाल की पत्नी अर्चना सुध-बुध खो चुकी है। रोते-रोते उसकी आंखें तक सूख चुकी हैं। उसके छोटे-छोटे तीन बच्चे हैं, वह नहीं समझ पा रहे कि आखिर हुआ क्या, जो उन्हें दूध-खाना तक नहीं मिल रहा। पिता रामसरन घर के अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। इसी तरह 40 वर्षीय अनिल की पत्नी बिटाना पांच बच्चों को सीने से लगाए पति के अंतिम दर्शन के लिए दरवाजे पर टकटकी लगाए है। गला जवाब दे चुका है। उसका एक ही कहना है कि अब वह बच्चों को कैसे पालेगी।
जन्म लेने से पहले ही पिता का साया उठ गया
घटना में मारे गए 25 वर्षीय रामू की पत्नी पूनम गर्भवती है। बच्चे के जन्म से पहले ही सुहाग उजाड़ गया और कोख में पल रहे बच्चे के सिर से पिता का साया। रामू की बहन कविता की तीन माह बाद ही शादी होनी है। बेटे के गम में माता-पिता छटपटा रहे हैं। रामू का दूसरा भाई भूरे इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ है।
कल्लू-राजकुमारी का इकलौता बेटा 19 वर्षीय छबिराम भी अब इस दुनिया में नहीं रहा। राम नरेश का 18 वर्षीय बेटा राघवेंद्र भी दम तोड़ चुका है और उसका 25 वर्षीय दूसरा भाई सोने लाल जिंदगी-मौत से जूझ रहा है। इनके अलावा 19 वर्षीय अनूप, 19 साल के ही सर्वेश 20 साल के नूर हसन, 22 वर्षीय इरफान सभी अविवाहित हैं, जिनके गम में माता-पिता बिलख रहे हैं।
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