हल्द्वानी: पति, उसकी पहली पत्नी और साली को आजीवन कारावास, दूसरी पत्नी और उससे हुए बेटे को मौत के घाट उतारने की रची थी साजिश

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हल्द्वानी, अमृत विचार। पति द्वारा अपनी दूसरी पत्नी और उससे हुए पुत्र (8 साल) को मौत के घाट उतारने के मामले में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीलम रात्रा की अदालत ने तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिनमें उसकी पहली पत्नी और साली को भी शामिल हैं। जिला शासकीय अधिवक्ता …

हल्द्वानी, अमृत विचार। पति द्वारा अपनी दूसरी पत्नी और उससे हुए पुत्र (8 साल) को मौत के घाट उतारने के मामले में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीलम रात्रा की अदालत ने तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिनमें उसकी पहली पत्नी और साली को भी शामिल हैं।

जिला शासकीय अधिवक्ता नवीन चंद्र जोशी के मुताबिक मूल निवासी ग्राम मझोला थाना भोजीपुरा जिला बरेली निवासी लालता प्रसाद उर्फ ललित गंगवार हल्द्वानी की नवाबी रोड पर पत्नी सोमवती संग किराये पर रहता था। पहली पत्नी के होने के बाद भी उसने भोजीपुरा के पीपलथाना निवासी अनारो देवी उर्फ प्रीति संग दूसरी शादी कर ली थी। अनारो के पति की मौत हो गई थी। जिससे उसकी बेटी दीपा उर्फ काजल थी। दीपा की भी शादी हो गई थी। भोजीपुरा में अपने गांव के पास रहने वाली अनारो संग दूसरी शादी करने की वजह पहले पति की मौत के बाद उसे बीमा में मिले लाखों रुपये थे। लालता ने यह शादी पैसों के लालच में की थी।

लालता से अनारो को एक बेटा हुआ। जिसका नाम सन्नी उर्फ पुष्कर था। लालता ने अनारो और बेटे को गांधीनगर इलाके में एक किराये का कमरा लेकर रखा था। जबकि वह खुद पहली पत्नी सोमवती संग नवाबी रोड पर रह रहा था। दो शादी होने के चलते कई बार विवाद इनमें आपस में विवाद होता था। जिसके चलते लालता ने अनारो को रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रच डाला और इसमें साथ दिया उसकी पहली पहली पत्नी साेमवती व साली शीला ने।

अधिवक्ता नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि अनारो की तबीयत खराब होने पर लालता ने कहा कि वह उसे बरेली में दिखाएगा। जिसके बाद 16 सितंबर 2013 को वह सेंट्रो कार से उसे व सन्नी को लेकर बरेली की तरफ चल दिया। लेकिन बरेली से पहले शीशगढ़ में अनारो की हत्या कर शव एक खेत में फेंक दिया। जबकि सन्नी को हल्द्वानी ले आया। इसके बाद धारधार हथियार से आठ साल के बेटे का भी कत्ल कर दिया। धड़ व सिर अलग नहर में बहा दिया। मासूम का धड़ बरेली रोड में सिंचाई गूल में मिला था। इसके बाद से मामले की जांच शुरू हुई।

जिला शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक घटना में शामिल तीनों लोगों का दोष सिद्ध करने के लिए कोर्ट में 18 गवाहों का परीक्षण कराया गया था। जिसके बाद लालता, सोमवती व शीला को हत्या के लिए आजीवन कारावास और एक-एक लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई। जबकि साक्ष्यों का विलोपन (मिटाने व झूठी जानकारी देने) करने के जुर्म में सात-सात साल की सजा व 50-50 हजार जुर्माना लगाया गया है।

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