रणनीतिक साझेदारी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। भारत-वियतनाम के बीच मित्रता और सहयोग की लंबी परंपरा है। इस वर्ष भारत और वियतनाम अपने राजनयिक संबंधों की 50 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। दोनों देश समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और समान विकास संबंधी दृष्टिकोण साझा करते हैं। वियतनाम का …
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। भारत-वियतनाम के बीच मित्रता और सहयोग की लंबी परंपरा है। इस वर्ष भारत और वियतनाम अपने राजनयिक संबंधों की 50 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। दोनों देश समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और समान विकास संबंधी दृष्टिकोण साझा करते हैं। वियतनाम का दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन से विवाद चल रहा है। वहीं, लद्दाख और अरुणाचल को लेकर भारत के साथ भी चीन के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में रक्षा मंत्री की वियतनाम यात्रा महत्वपूर्ण हो जाती है।
इस दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से 2030 तक के लिए संयुक्त दृष्टिकोण पत्र पर हस्ताक्षर किए। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस दृष्टिकोण पत्र के जरिए दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में एक बड़ी बढ़त होगी। दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी लॉजिस्टिक सहयोग में प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। ध्यान रहे अमेरिका, फ्रांस और रूस के बाद अब भारत ने वियतनाम के साथ लॉजिस्टिक सहयोग पर करार किया है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब खबर है कि चीन भी दक्षिण-पूर्व एशियाई देश कम्बोडिया में एक खुफिया नेवल बेस तैयार कर रहा है।
भारत और वियतनाम के बीच जो करार हुआ है उसके तहत दोनों देशों के युद्धपोत और विमान एक दूसरे के बेस पर बिना किसी रोक-टोक के रुक सकेंगे। भारत पहला ऐसा देश है जिसके साथ वियतनाम ने इस तरह का लॉजिस्टिक सहयोग करार किया है। रक्षा मंत्री ने गुरुवार को वियतनाम को 12 रक्षक नौकाएं भी सौंपी। इनका प्रयोग वियतनाम अपनी समुद्री-सीमाओं की सुरक्षा के तौर पर करेगा। आपको बता दें कि जिस तरह भारत का चीन के साथ एलएसी विवाद चल रहा है उसी तरह से वियतमाम का लंबे समय से चीन के साथ समुद्री-सीमाओं को लेकर विवाद चल रहा है।
महत्वपूर्ण है कि वर्ष 2016 से भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी भी स्थापित हो चुकी है। रक्षामंत्री ने वियतनाम को भारत के रक्षा औद्योगिक परिवर्तन का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया। क्योंकि भारत का रक्षा उद्योग रणनीति की दृष्टि से भारत का प्रमुख उद्योग है। 13 लाख से अधिक लोग इससे सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। घरेलू रक्षा उद्योग न केवल हमारी जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय आवश्यकताओं पर भी खरा उतरता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि रक्षा मंत्री की यह यात्रा भारत-वियतनाम के संबंधों को और विकसित करने और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती प्रदान करेगी।
