लखीमपुर-खीरी: महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउण्ड के लिए वसूले जा रहे 200 रूपये

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Edited By Amrit Vichar
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लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउण्ड कराने के लिए आने वाली महिलाओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। दूरदराज से आने वाली गर्भवती महिलाओं को 200 रूपये तक देने के बाद ही उनका अल्ट्रासाउण्ड हो पा रहा है। इस अवैध वसूली में आशाएं अहम भूमिका निभा रही है। ऐसा नहीं की महिला …

लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउण्ड कराने के लिए आने वाली महिलाओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। दूरदराज से आने वाली गर्भवती महिलाओं को 200 रूपये तक देने के बाद ही उनका अल्ट्रासाउण्ड हो पा रहा है। इस अवैध वसूली में आशाएं अहम भूमिका निभा रही है। ऐसा नहीं की महिला अस्पताल की सीएमएस को इस बात की जानकारी नहीं है। लेकिन वह जानकारी होने के बाद भी कोई कार्रवाई नही कर रहीं है। इससे जिम्मेदारों के हौसले बुलंद है।

गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार भले ही कई योजनाएं संचालित कर ले लेकिन मातहत इन योजनाओं में पलीता लगा रहे है। महिला अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं का निशुल्क अल्ट्रासाउण्ड और जांचे की जाती हैं लेकिन विभागीय लोगों ने इसे कमाई का एक जरिया बना लिया। यहां पर दूरदराज से आनी वाली महिलाओं को उसी दिन अल्ट्रासाउण्ड करवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पडती है।

यदि महिलाएं रूपये दे दे तो उनका अल्ट्रासाउण्ड किया जाता है यदि रूपये नहीं दिये जाते हैं तो उन्हें भीड होने का बहाना बनाते हुए दूसरे दिन आने को कह दिया जाता है। वसूली में गांवों से आने वाली आशाएं अहम भूमिका निभाती है। वह महिलाओं से अल्ट्रासाउण्ड कराने के लिए 200 रूपये की मांग करती है और रूपये मिलते ही पहले नम्बर पर उनका काम करवा देती है। बताते हैं कि आशाओं की सेटिंग बाहर बैठे गेट कीपर से लेकर अल्ट्रासाउण्ड करने वाले डाक्टर से है।

ऐसा नहीं कि सीएमएस के साथ साथ अन्य उच्चाधिकारियों को इस बात की जानकारी न हो लेकिन वह लोग भी कुछ नहीं कर पा रहे है। कार्रवाई न होने की वजह से अल्ट्रासाउण्ड कर रहे डा. केके रंजन के साथ साथ आने वाली आशाओं के हौसले बुलंद है। जिला महिला अस्पताल में हर रोज अल्ट्रासाउंड के लिए 50 टोकन वितरित किये जाते है लेकिन होते रोज करीब 100 है।

इसके पीछे अल्ट्रासाउण्ड कर रहे डाक्टर केके रंजन का कहना है कि 50 टोकन के बाद स्टाफ के साथ साथ कुछ जरूरतमंद महिलाएं आती है जिनका इमरजेंसी में अल्ट्रासाउण्ड करना पडता है। अल्ट्रासाउण्ड कराने आयी मुड़ियाखेडा की रिंकी और सरिता के अलावा सोनारीपुर की शिवकुमारी कहती है कि उन्हें आशा जिला महिला अस्पताल लेकर आयी है और डाक्टर को रूपये देने की बात कहते हुए दो दो सौ रूपये लिए है। जिसके बाद भी अभी तक अल्ट्रासाउण्ड नहीं हो सका है।

सौ रूपये आशा तो सौ रूपये लेते है डाक्टर
जिला महिला अस्पताल के सूत्र बताते है कि 50 टोकन वितरित होने के बाद आने वाली महिलाओं से 200 रूपये की जबरन वसूली की जाती है जिसमें सौ रूपये आशा के तो सौ रूपये अल्ट्रासाउण्ड कराने वाले डाक्टर को दिये जाते है। महिला अस्पताल की सीएमएस ज्योति मेहरोत्रा (छुटटी पर है) ने तमाम मिली शिकायतों के बाद डाक्टर केके रंजन की जमकर फटकार लगाते हुए दोबारा ऐसा न करने की हिदायत दी थी उसके बाद से ही टोकन सिस्टम शुरू कराया गया था। बताते हैं कि टोकन वाली महिलाओं से भी पहले नम्बर लगाने के लिए रूपयो की मांग की जाती है।

मै कोई भी नहीं लेता धनराशि, आरोप निराधार
जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउण्ड करने वाले चिकित्सक डाक्टर केके रंजन का कहना है कि मै किसी भी महिला से कोई भी धनराशि की मांग नहीं करता हूं। मेरे नाम पर की जा रही वसूली के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। सारे आरोप निराधार है। 50 टोकनों पर अल्ट्रासाउण्ड करने के बाद केवल जरूरी और इमरजेंसी महिलाओं के ही अल्ट्रासाउण्ड किये जाते है।

महिलाओं के साथ वसूली होना गलत
यदि गर्भवती महिलाओं के साथ अल्ट्रासाउण्ड करवाने के नाम पर वसूली की जा रही है तो यह सरासर गलत है। मै अपने स्तर से पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपते हुए कार्रवाई किये जाने की बात कहूंगी— पुष्पलता, प्रभारी सीएमएस।

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