हल्द्वानी: एक्टू के जिला सम्मेलन में बोले वक्ता- हिंदू-मुस्लिम की राजनीति के बजाय श्रम कानूनों को बहाल कर रोजगार के अवसर दे सरकार
हल्द्वानी, अमृत विचार। मजदूरों के अधिकारों में लगातार कटौती की जा रही है। महंगाई लगातार बढ़ रही है लेकिन मजदूरी बेहद कम है। साल दर साल मजदूरों के अधिकारों में कटौती की जा रही है। लेकिन सरकार है कि नफरत की राजनीति करने में असल मुद्दों से देश के नागरिकों को गुमराह कर रही है। …
हल्द्वानी, अमृत विचार। मजदूरों के अधिकारों में लगातार कटौती की जा रही है। महंगाई लगातार बढ़ रही है लेकिन मजदूरी बेहद कम है। साल दर साल मजदूरों के अधिकारों में कटौती की जा रही है। लेकिन सरकार है कि नफरत की राजनीति करने में असल मुद्दों से देश के नागरिकों को गुमराह कर रही है।

हल्द्वानी में नगर निगम के सभागार में आयोजित जिला सम्मेलन में यह बातें एक्टू से जुड़े पदाधिकारियों ने कहीं। वक्ताओं ने कहा कि संविधान में देश के नागरिकों को जो अधिकार मिले हैं, सरकार को उसे हर नागरिक को देना सुनिश्चित करना चाहिए। अस्थायी रोजगार के बजाय सरकार को स्थायी रोजगार के अवसर देने होंगे जिससे महंगाई के दौर में मजदूर सम्मानजनक जीवन जी सकें।

एक्टू नेता कॉमरेड डॉ. कैलाश पांडेय ने कहा कि आज देश को सांप्रदायिक नफरत में बांटने की साजिश रची जा रही है वहीं जनमुद्दों से देश को भटकाने का कुचक्र रचा रहा है। रोजगार की गारंटी खत्म कर दिया गया। नौकरी में ठेका और अनुबंध का बोलबाला बढ़ता ही जा रहा है। निश्चित मानदेय की गारंटी भी खत्म कर दी गई वहीं ठेका पर बहाल कर्मचारियों की सेवा नियमित करने में सरकार आनाकानी कर रही है। न समय पर वेतन मिल रहा है न ही मजदूरों की सुरक्षा की कोई गारंटी है।
एक्टू के प्रदेश सचिव केके बोरा ने कहा कि सरकार केवल हिंदू मुसलमान की राजनीति कर अपने कर्तव्यों से इतिश्री नहीं कर सकती। अगर समय रहते सरकार ने मजदूर हित में कदम नहीं उठाए तो मजदूर आंदोलन को बाध्य होंगे। बैठक के दौरान न्यूनतम मजदूरी 26 हजार घोषित करने, ईपीएफ की पेंशन न्यनतम 18 हजार करने और आशा आंगनबाड़ी भोजनमाताओं को सरकारी वेतन का लाभ देने समेत कई सवालों पर संघर्ष तेज करने की रणनीति बनाई गई। इस दौरान ऐक्टू से जुड़ी सभी यूनियनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सम्मेलन में एक्टू की नयी जिला काउंसिल, कार्यकारिणी और पदाधिकारियों का चुनाव किया गया।
