चिंताजनक स्थिति
वर्ष 2016 में सरकार की ओर से दावा किया गया था कि नोटबंदी से जाली मुद्रा पर रोक लगेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सरकार ने 500 और 1000 रुपए वाले नोट बंद करके 2000 रुपए के नए नोट जारी किए थे। दलील दी गई थी कि इन नोटों में अनेक हाई सिक्योरिटी फीचर्स हैं जिनकी …
वर्ष 2016 में सरकार की ओर से दावा किया गया था कि नोटबंदी से जाली मुद्रा पर रोक लगेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सरकार ने 500 और 1000 रुपए वाले नोट बंद करके 2000 रुपए के नए नोट जारी किए थे। दलील दी गई थी कि इन नोटों में अनेक हाई सिक्योरिटी फीचर्स हैं जिनकी नकल करना संभव नहीं होगा। परंतु दो हजार तथा 500 रुपए मूल्य वाले नकली नोटों का प्रचलन बढ़ रहा है। इस संबंध में हाल ही में जारी रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट चौंकाने वाली है।
केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में नकली नोटों की संख्या काफी बढ़ गई है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, 500 रुपये के नकली नोटों में साल 2020-2021 में 102 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि 2000 रुपये के जाली नोट में 54.16 फीसदी का इजाफा हुआ है। 31 मार्च 2022 तक बैंक में जमा हुए 500 और 2000 रुपए के नोट में 87.1 प्रतिशत नकली नोट थे। 31 मार्च 2021 तक यह आंकड़ा 85.7 प्रतिशत था। निश्चय ही यह चिंताजनक स्थिति है। क्योंकि आंकड़े आरबीआई के संज्ञान में आए नोटों के हैं। वास्तव में चलन में कई गुना नकली नोट प्रचालित हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में 92 करोड़ से अधिक के नकली नोट बरामद किए गए।
जाली मुद्रा के खेल में पड़ोसी देशों की सरकारें भी शामिल हैं। ये देश भारतीय अर्थव्यस्था को नुकसान पहुंचाने व आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए जाली मुद्रा का इस्तेमाल करते हैं। सरकार ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि भारत, नेपाल और बांग्लादेश से तस्करी करके करेंसी देश में लाई जाती है। करेंसी की तस्करी रोकने को राज्य केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने के लिए गृह मंत्रालय ने जाली भारतीय करेंसी नोट समन्वय समूह (एमसीओआरडी) बनाया।
ऐसा नहीं है कि सरकार व एजेंसियां नकली नोटों के प्रति सजग नहीं हैं। गाहे-बगाहे नकली नोटों की जब्ती व अपराधियों की गिरफ्तारी की खबरें आती हैं। अब नई तकनीक के जरिए भी जाली नोटों के धंधेबाजों के खिलाफ शिकंजा कसा जाना चाहिए। संवेदनशील स्थलों की चौबीस घंटे निगरानी, अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर चौकसी बढ़ाने तथा गश्त तेज करने की जरूरत है। बांग्लादेश की तरह अन्य देशों के साथ भी नकली नोटों की तस्करी रोकने के लिये समझौते किए जाने चाहिए। नकली व वास्तविक नोट की मौके पर ही पहचान करने के लिए जनता को जागरूक करना भी जरूरी है।
