रामपुर: नियमित यौगिक क्रियाओं से सुधार सकते हैं अपना जीवन चक्र

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रामपुर, अमृत विचार। विश्व योग दिवस मंगलवार को मनाया जाएगा। परमहंस जितेंद्र भारतीय महायोग शोध संस्थान और त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ के आचार्य महायोगी डॉ. राधेश्याम शर्मा वासंतेय ने योगासन और प्राणायाम से तमोगुण और रजोगुण के शांत होने और सतोगण का स्थापन होने की जानकारी दी है। उन्होंने योग को सभी मानव मात्र के लिए जरूरी …

रामपुर, अमृत विचार। विश्व योग दिवस मंगलवार को मनाया जाएगा। परमहंस जितेंद्र भारतीय महायोग शोध संस्थान और त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ के आचार्य महायोगी डॉ. राधेश्याम शर्मा वासंतेय ने योगासन और प्राणायाम से तमोगुण और रजोगुण के शांत होने और सतोगण का स्थापन होने की जानकारी दी है। उन्होंने योग को सभी मानव मात्र के लिए जरूरी बताया है। उनका कहना है कि नियमित यौगिक क्रियाओं से अपना जीवन चक्र सुधार सकते हैं।

योग दिवस की पूर्व संध्या पर अमृत विचार से खास बातचीत में अस्सी वर्षीय महायोगी वासंतेय ने कहा कि योग मानव मात्र के कल्याण के लिए ही वेद से उत्पन्न हुआ है। योग को कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं। सूर्योदय या सूर्य अस्ताचल हो तो और भी अच्छा है। उन्होंने कहा कि योग को किसी भी दिशा में बैठकर करें, दसों दिशाएं ईश्वर की हैं। योग को नियमित करें और हंसते खेलते स्वभावगत करें। योगासन का जाति-धर्म से कोई संबंध नहीं है। यह केवल मानव मात्र के कल्याण के लिए है।

आठ आसन आठ ही शरीर के अंग। 12 अंग को द्वादश आसन और सूर्य की बारह कलाएं। इसीलिए सूर्य नमस्कार कहा जाता है। इस कला में सूर्य की किरणों की ओर झुकते हैं, इसे सगुण या निर्गुण वंदना नहीं कहते। इसमें हिंदू भी सजदा करता है और मुसलमान भी सजदा करता है, क्योंकि गुरु या पीर के सामने साष्टांग लेट रहे हैं। इसलिए पांचों वक्त की नमाज को भी योग की तरह ही माना जाना चाहिए, इसीलिए मुसलमान को पांचों वक्त की नमाज जरूरी है और उन्हें करना भी चाहिए।

ऐसे करें योगासन की शुरूआत
महायोगी वासंतेय ने बताया कि योगासन को नियमित अभ्यास बना लें। नित्य सुबह को उठें, जलपान करें और नित्यक्रिया से उदर को खाली करें, फिर प्राणायाम और आसन करें। सूर्य नमस्कार का अभ्यास करें। प्राणायाम और योगासन से तमोगुण, रजोगुण शांत होता है और फिर सतोगुण का स्थापन होता है। बच्चे जिस तरह से झुनझुना रूपी खिलौने से खेलते हैं, ठीक इसी तरह स्वभावगत बड़ों को भी खेल खेल में योग की क्रियाएं नियमित करनी चाहिए। प्रतिदिन 30 मिनट तक की यह क्रिया है। अगर दैनिक जीवन में योग क्रिया को सभी ने अपने जीवन में उतार लिया तो रोग पास नहीं आएंगे और पूरा जीवन सुखमय हो जाएगा।

मूलाधार से आज्ञा चक्र का एक एक वर्णन शास्त्रों में
महायोगी ने बताया कि योगा का नाम सामने आते ही पूरा श्रीमदभागवत गीता सामने आती है। छहों शास्त्र सामने आते हैं। मूलाधार से आज्ञाचक्र का एक एक वर्णन शास्त्रों में है। इसमें सभी कोष आ जाते हैं। छहों चक्र (श्री गुरुचक्र, आज्ञा चक्र, विशुद्ध चक्र, अनाहत चक्र, मणिपुर चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मूलाधार चक्र) इसी तरह से त्रिकोणात्मक श्री गुरु चक्र में सहस्र दल, द्वि दल, षोडस दल, द्वादश दल, दश दल, षट दल, चतुर्दल हैं। वर्ण बीजाक्षर, मथ सूक्ष्म फट चक्रों की जाग्रति होती है। दो साधनाएं हैं एक व्यक्त साधना और दूसरी अव्यक्त साधना। इन्हीं पर विश्व के सभी धर्म चल रहे हैं। एक निराकार उपासना है तो दूसरी साकार उपासना है। ऐसा कोई जीव नहीं है जो साकार उपासना न करता हो,सारे धर्म साकार उपासना करते हैं। जब नाद ध्वनि का प्रयोग करते हैं, जब गॉड या अल्लाह शब्द का प्रयोग करते समय एक बिंदु उभरता है। ‘अ’ से लेकर ‘ल’ तक की दायां स्वर और वायां स्वर यही योग है। वेदों से वेदातीत ध्वनि तरंगे हैं और प्रकाश संपूर्ण मानव की आवश्यकता है। जितने भी शरीरधारी प्राणी जीव हैं जोकि चलने उठने की कला करते हैं वही योग है। हिरण्यगर्भ साकार है अव्यक्त है। पहली ध्वनि ओमकार अक्षर ब्रह्म से नाद ही ओम बना है।

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