बरेली: 85 फीसदी मेडिकल स्टोर बिना FSDA में पंजीकरण के हो रहे संचालित

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बरेली, अमृत विचार। मेडिकल स्टोर को औषधि विभाग से लाइसेंस लेने की आवश्यकता होती है। इस लाइसेंस पर केमिस्ट सिर्फ दवा बेच सकते हैं, मगर इन मेडिकल स्टोर्स पर बड़ी संख्या में फूड सप्लीमेंट भी मिल जाएंगे। इसे देखते हुए बीते दिनों मेडिकल स्टोर्स पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग से पंजीकरण और लाइसेंस को …

बरेली, अमृत विचार। मेडिकल स्टोर को औषधि विभाग से लाइसेंस लेने की आवश्यकता होती है। इस लाइसेंस पर केमिस्ट सिर्फ दवा बेच सकते हैं, मगर इन मेडिकल स्टोर्स पर बड़ी संख्या में फूड सप्लीमेंट भी मिल जाएंगे। इसे देखते हुए बीते दिनों मेडिकल स्टोर्स पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग से पंजीकरण और लाइसेंस को भी अनिवार्य कर दिया गया था।

मगर अब तक करीब 15 फीसदी मेडिकल संचालकों ने ही एफएसडीए से पंजीकरण करवाया है। यह स्थिति तब है जब शासन की तरफ से एफएसडीए को सख्त निर्देश हैं कि मेडिकल स्टोर्स पर बिना पंजीकरण और लाइसेंस के किसी भी प्रकार का फूड सप्लीमेंट नहीं बिकने दिया जाएगा।

औषधि विभाग के अनुसार जनपद में लगभग 4000 मेडिकल स्टोर्स पंजीकृत हैं। जिनको विभाग द्वारा मेडिकल का लाइसेंस जारी किया गया है, लेकिन एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग) के आंकड़ों पर नजर डालें तो इनमें से 85 फीसदी मेडिकल स्टोर संचालकों ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है।

करीब 650 दवा व्यापारियों ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में पंजीकरण कराया है। 12 लाख से कम सालाना टर्न ओवर वाले व्यापारियों को विभाग में पंजीकरण कराना होता है। वहीं, इससे अधिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों को एफएसडीए से लाइसेंस लेना होता है। जनपद में अब तक महज 16 बड़े दवा व्यापारियों ने ही फूड लाइसेंस बनवाया है

। एफएसडीए अधिकारियों के मुताबिक पेय या खाद्य सामग्री बेचने के लिए लाइसेंस अथवा पंजीकरण होना अनिवार्य है। ऐसा न करना फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी आफ इंडिया के नियमों के खिलाफ है। कैंप लगाए जाने के बाद भी मेडिकल संचालकों के फूड लाइसेंस बनवाने और विभाग में पंजीकरण करने की रफ्तार धीमी है। उधर, शासन ने विभागीय अफसरों को मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण कर पंजीकरण या लाइसेंस जारी करने की कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट हर सप्ताह भेजने के निर्देश दिए हैं।

यह फूड सप्लीमेंट मिलते हैं मेडिकल पर
मेडिकल स्टोर्स पर बेचे जाने वाले काफी उत्पाद फूड सप्लीमेंट की श्रेणी में आते हैं। जिसमें प्रोटीनेक्स, हेल्थ टानिक, च्यवनप्राश, शहद, मिल्क पाउडर, शुगर फ्री टेबलेट, ग्लूकोज व अन्य हेल्थ सप्लीमेंट शामिल हैं। इन खाद्य पदार्थों को बेचने के लिए फूड लाइसेंस या एफएसडीए में पंजीकरण होना अनिवार्य है। इन फूड सप्लीमेंट को औषधि विभाग के लाइसेंस पर नहीं बेचा जा सकता है।

बड़ी संख्या में कोटेदार पंजीकरण को बाकी
कोटेदारों के लिए भी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग से पंजीकरण कराने को अनिवार्य किया गया था। जिले में करीब 1800 कोटेदार हैं। पूर्ति विभाग से कोटेदारों की सूची लेकर कुछ कोटेदारों का पंजीकरण एफएसडीए ने कराया भी था, लेकिन कितने कोटेदारों का पंजीकरण हुआ, इसका जवाब विभाग के अधिकारियों के पास नहीं है। हालांकि, एफएसडीए के अधिकारी यह मानते हैं कि बड़ी संख्या में कोटेदारों का पंजीकरण नहीं हुआ है।

मगर पंजीकरण कराने में सुस्त
जिले में 14 एफएसओ अब तक करीब 14000 दुकानों का पंजीयन तो 2800 का लाइसेंस ही बना पाए हैं। एफएसओ पंजीकरण कराने में सुस्त हैं। इसमें 4000 केमिस्ट और 1800 कोटेदारों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 5800 हो जाती है। जिले में लगभग छोटे बड़े 8000 से अधिक मिष्ठान भंडार, 15 हजार से अधिक किराना स्टोर, 10 हजार से अधिक रेस्त्रां , बेकरियां, खाद्य उत्पाद तैयार करने वाली छोटी फैक्ट्रियां आदि शामिल हैं।

पंजीकरण व लाइसेंस की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार कैंप लगाए जा रहे हैं। जो दुकानदार पंजीकरण या लाइसेंस नहीं लेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी-धर्मराज मिश्र, सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय।

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