बरेली: गुजरात के सिंथेटिक बैग करेंगे रामगंगा के तटबंधों की सुरक्षा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। अक्टूबर 2021 में आई आपदा में सूदनपुर गांव स्थित रामगंगा नदी पर बना तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके पुनर्निर्माण में सिंचाई विभाग बाढ़ खंड लगा हुआ है। तटबंध में इस बार सिंथेटिक बैग का प्रयोग किया जा रहा है ताकि नदी के कटान को रोका जा सके और बाढ़ का खतरा …

बरेली, अमृत विचार। अक्टूबर 2021 में आई आपदा में सूदनपुर गांव स्थित रामगंगा नदी पर बना तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके पुनर्निर्माण में सिंचाई विभाग बाढ़ खंड लगा हुआ है। तटबंध में इस बार सिंथेटिक बैग का प्रयोग किया जा रहा है ताकि नदी के कटान को रोका जा सके और बाढ़ का खतरा कम हो सके। यह बैग गुजरात से मंगाए गए हैं और एक बैग की कीमत 50 हजार रुपये के करीब बताई जा रही है।

रामगंगा नदी का जलस्तर अक्टूबर 2021 में इतना हो गया था कि पानी यहां बने तटबंध को तोड़कर गांव के अंदर घुस गया। इसके कारण एक दर्जन से अधिक गांव जलमग्न हो गए। ग्रामीणों की लाखों रुपये की फसल और सामान आपदा की भेंट चढ़ गया। पिछले दिनों जिलाधिकारी ने यहां का दौरा किया और तटबंध के पुनर्निर्माण के निर्देश सिंचाई विभाग बाढ़ खंड को दिए। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड ने इसके लिए 87 लाख रुपये का बजट बनाकर शासन को भेजा।

बजट मिलने के बाद यहां कार्य शुरू हो गया। यहां बाढ़ से बचाव के लिए सिंथेटिक बैग से तटबंध तैयार किया जा रहा है। अधिकारी बताते हैं कि पानी का कटान रोकने के लिए पहले पत्थर का प्रयोग किया जाता था, लेकिन यह कारगर साबित नहीं होता था। कुछ स्थानों पर बोरो में मिट्टी भरकर भी तटबंध तैयार किए जाते थे, लेकिन ये भी पानी के बहाव के कारण ज्यादा दिन तक नहीं चल पाते थे। पिछले साल तटबंध में सिंथेटिक बैग का प्रयोग किया गया, जो अभी तक चल रहा है। नदी ने भी तटबंध का उसी स्थान पर नुकसान किया जहां सिंथेटिक बैग नहीं लग पाए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार पूरे तटबंध में सिंथेटिक बैग लगाने का कार्य किया जा रहा है।

सिंथेटिक बैग की उम्र है 25 साल
सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता राजेंद्र सिंह बताते हैं कि सिंथेटिक बैग की उम्र 25 साल के करीब है। बशर्ते इन बैग को किसी नुकीली वस्तु से क्षतिग्रस्त न किया जाए। उन्होंने बताया कि 20 मीटर लंबे और तीन मीटर चौड़े सिंथेटिक बैग में पहले मशीन से रेत व पानी भरा जाता है। इसके बाद पानी धीरे-धीरे निकल जाता है और रेत अंदर रह जाती है। रेत के कारण यह काफी मजबूत हो जाता है और पानी के कटान को रोकता है। सूदनपुर में 60 के करीब सिंथेटिक बैग लगाए जाने हैं।

यह भी पढ़ें- बरेली: प्रेमिका ने जहर खाकर साबित किया प्यार

संबंधित समाचार