उपचुनाव नतीजों के संकेत
उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ और रामपुर की लोकसभा सीटों के लिए कराए गए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। दोनों ही सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। आजमगढ़ से भाजपा उम्मीदवार दिनेश लाल यादव निरहुआ समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धर्मेन्द्र यादव से चुनाव जीत गए हैं। बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार …
उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ और रामपुर की लोकसभा सीटों के लिए कराए गए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। दोनों ही सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। आजमगढ़ से भाजपा उम्मीदवार दिनेश लाल यादव निरहुआ समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धर्मेन्द्र यादव से चुनाव जीत गए हैं। बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार शाह आलम उर्फ गुड्डु जमाली तीसरे स्थान पर रहे। आजमगढ़ से कुल 13 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।
सपा के लिए आजमगढ़ और रामपुर दोनों ही सीट प्रतिष्ठापरक थीं, क्योंकि 2019 के चुनाव में यह उसी के पास थी। आजमगढ़ सीट से 2019 में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनाव जीते थे जबकि 2014 में इस सीट से खुद मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़े थे और जीत दर्ज कराई थी। इसी तरह रामपुर की सीट से 2019 में आजम खां चुनाव लड़े थे और जीते थे, जबकि 2009 में रामपुर की सीट भाजपा के खाते में गयी थी।
उसके उम्मीदवार डॉ. नेपाल सिंह ने यहां से जीत का परचम फहराया था। उप चुनाव को 2024 के आम चुनाव के मद्देनजर देखा जा रहा था। इसे लिटमस टेस्ट भी कहा जा रहा था। आजमगढ़ की सीट से सीधे मुलायम सिंह यादव परिवार की प्रतिष्ठा जुड़ी थी जबकि रामपुर की सीट से आजम खां की प्रतिष्ठा जुड़ी थी।
मोहम्मद आजम खां ने आसिम रजा को चुनाव मैदान में उतारा था। आसिम रजा रामपुर में पिछले एक दशक से समाजवादी पार्टी के नगर अध्यक्ष रहे थे, हालांकि उनके लिए यह पहला बड़ा चुनाव था। आसिम रजा का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार घनश्याम सिंह लोधी से था। लोधी भी समाजवादी ही थे। इसी साल फरवरी के महीने में समाजवादी पार्टी का खेमा छोड़ कर भाजपा के खेमे में आए थे। लोधी दो बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके थे।
बहरहाल रामपुर से लोधी की जीत ने मोहम्मद आजम खां की प्रतिष्ठा पर प्रश्न चिन्ह लगाया है। जैसा कि होता है समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दल किसी बड़े खेल की आशंका कर रहे है, लेकिन इतना तो स्पष्ट ही है कि जिस तरीके से इन दोनों ही सीटो के लिए कराए गए उपचुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में गए हैं, वह इस बात का सबूत है कि जनता भारतीय जनता पार्टी की नीतियां और कार्यशैली से संतुष्ट है और उसने एक बार फिर उस पर अपनी मुहर लगा दी है। इससे भारतीय जनता पार्टी की नैतिक जिम्मेदारी भी बढ़ी है।
