सुखद भविष्य के लिए
सिंगल यूज प्लास्टिक पर शुक्रवार से सारे देश में प्रतिबंध लागू हो गया। सुखद भविष्य के लिए यह फैसला आवश्यक था। हालांकि सिंगल यूज प्लास्टिक पर मौजूदा प्रतिबंध काफी सीमित हैं, फिर भी यह बड़े खतरे से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जबकि कुछ कंपनियों की ओर से प्रतिबंध लगाने की समय …
सिंगल यूज प्लास्टिक पर शुक्रवार से सारे देश में प्रतिबंध लागू हो गया। सुखद भविष्य के लिए यह फैसला आवश्यक था। हालांकि सिंगल यूज प्लास्टिक पर मौजूदा प्रतिबंध काफी सीमित हैं, फिर भी यह बड़े खतरे से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जबकि कुछ कंपनियों की ओर से प्रतिबंध लगाने की समय सीमा बढ़ाए जाने की मांग लगातार की जा रही थी।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रतिबंध के प्रवर्तन की निगरानी के लिए राष्ट्रीय नियंत्रण कक्ष की स्थापना की है, इसके अलावा राज्य बोर्डों को सोशल मीडिया अभियानों सहित व्यापक जागरुकता गतिविधियों के अलावा उद्योगों, कॉलेजों, स्कूलों और अन्य संस्थानों के साथ संवादात्मक बैठकें करने के लिए कहा है।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रतिबंध प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, राज्य बोर्डों को औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के निरीक्षण को तेज करने का भी निर्देश दिया गया है। निस्संदेह, सरकार ने इस पर रोक को लेकर दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई है लेकिन इसका क्रियान्वयन तभी संभव है जब नियामक एजेंसियां सख्ती से फैसले का क्रियान्वयन करेंगी। प्रतिबंध को लागू कराने के लिए आगे केंद्र और राज्य सरकारों को लंबा रास्ता तय करना है।
क्योंकि देश को प्लास्टिक कचरे के प्रदूषण से मुक्त कराने का सफर आसान नहीं है और यह केवल प्लास्टिक इंडस्ट्री और सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। मौजूदा प्रतिबंध को कामयाब बनाने के लिए कच्चा माल तैयार करने में शामिल लोगों, प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स, बड़ी एफएमसीजी कंपनियों, केंद्र और राज्य सरकारों समेत उपभोक्ताओं को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
नागरिक अपने कचरे के लिए स्वयं जिम्मेदार बनें और उन चीजों का इस्तेमाल न करें जो प्रतिबंधित हैं। केंद्र सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने की प्रतिबद्धता जताते हुए अगस्त, 2021 में एक अधिसूचना जारी की थी। प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची में ईयरबड्स, कटलरी, स्ट्रॉ और कैरी बैग (120 माइक्रॉन से कम मोटाई के, दिसंबर 2022 तक) शामिल हैं। कैरी बैग पर प्रतिबंध नया नहीं है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 25 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों ने उस पर पहले से प्रतिबंध लगा रखा है। राज्यों का कहना है कि प्लास्टिक की मोटाई के आधार पर इस प्रतिबंध को नियंत्रित करना मुश्किल है। वैसे इस संबंध में राज्यों के प्रयास नाकाफी साबित हुए है। यही वजह है कि नए प्रतिबंध को लागू करना ही यह सुनिश्चित करेगा कि प्लास्टिक कचरे के खिलाफ यह लड़ाई कितनी सफल रहेगी।
