बरेली: भ्रष्टाचार में फंसे तहसीलदार शेर बहादुर के विरुद्ध विभागीय जांच पूरी
बरेली, अमृत विचार। भ्रष्टाचार के मामले में फंसे तहसीलदार शेर बहादुर सिंह के विरुद्ध विभागीय जांच पूरी हो गई है। इस केस से जुड़े सभी लोगों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार तहसीलदार और निलंबित अर्दली अबरार के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में रिपोर्ट दर्ज कराने वाले वादी, अर्दली को 1.80 लाख रुपये …
बरेली, अमृत विचार। भ्रष्टाचार के मामले में फंसे तहसीलदार शेर बहादुर सिंह के विरुद्ध विभागीय जांच पूरी हो गई है। इस केस से जुड़े सभी लोगों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार तहसीलदार और निलंबित अर्दली अबरार के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में रिपोर्ट दर्ज कराने वाले वादी, अर्दली को 1.80 लाख रुपये की रिश्वत देने वाले प्रदीप ने अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। दोनों ने तहसीलदार और अर्दली पर लगे आरोपों को सही बताते हुए पांच लाख रुपये की रिश्वत डील तहसीलदार से होने के साथ ही अर्दली काे अप्रैल में रिश्वत देने का आरोप भी दोहराया है। इससे माना जा रहा है कि तहसीलदार की मुश्किलें बढ़ेंगी।
वहीं, सूत्रों ने बताया कि तहसीलदार ने रिश्वत डील होने की बात मनगढ़ंत होने और अर्दली ने अपने बयान में 1.80 लाख रुपये लेने की बात गलत बताई है। हालांकि, अभी रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है। मामले में एसडीएम सदर कुमार धर्मेंद्र विभागीय जांच कर रहे हैं। एक दो दिन में मामले की जांच रिपोर्ट तैयार होने की चर्चा है। संभवत: सोमवार या मंगलवार तक रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी। इधर, जांच अधिकारी एसडीएम सदर कुमार धर्मेंद्र से प्रकरण में बात करने के लिए फोन किया लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
तहसीलदार और निलंबित अर्दली फरीदपुर में ही तैनात
पिछले शनिवार को शेर बहादुर सिंह फरीदपुर तहसीलदार बना दिए गए थे। इसके साथ प्रकरण में निलंबित किए गए अर्दली अबरार को भी फरीदपुर तहसील से संबद्ध किया गया है। एक ही तहसील में तैनाती को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं।
महत्वपूर्ण प्रकरण में पुलिस की जांच की गति धीमी
तहसीलदार शेर बहादुर सिंह और अर्दली अबरार के विरुद्ध कोतवाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में एफआईआर दर्ज है। प्रकरण की जांच सीओ प्रथम श्वेता यादव कर रही हैं। प्रकरण में अर्दली के नोट गिनने का वीडियो भी वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में दिख रही जगह का मिलान कराने के लिए सीओ तहसीलदार आवास जाकर निरीक्षण कर चुकी हैं। वादी भी अपने बयान दर्ज करा चुके हैं। उसके बावजूद महत्वपूर्ण मामले की जांच धीमी गति से आगे बढ़ रही है।
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