लखनऊ: राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन में बोले डॉक्टर, आपातकालीन स्थिति में कारगर है होम्योपैथी

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लखनऊ। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2000 में यह नारा दिया था कि उपचार जन-जन तक पहुंचायेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। 22 साल बाद भी लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है। यह कहना है डॉ.एस.डी.सिंह का। उन्होंने यह बातें केजीएमयू के अटल बिहारी कंवेशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी …

लखनऊ। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2000 में यह नारा दिया था कि उपचार जन-जन तक पहुंचायेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। 22 साल बाद भी लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है। यह कहना है डॉ.एस.डी.सिंह का।

उन्होंने यह बातें केजीएमयू के अटल बिहारी कंवेशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन-2022 के दूसरे दिन कही। डॉ.एस.डी.सिंह ने कहा कि होम्योपैथी एक मात्र चिकित्सा पद्ति है, जिसमें लागत कम है, ऐसे में होम्योपैथी के माध्यम से हम जन-जन तक पहुंचा सकते हैं और इसीलिए इस राष्ट्रीय होम्योपैथिक सम्मेलन-2022 का आयोजन किया गया हैं।

उन्होंने बताया कि होम्योपैथी इमरजेंसी में 100 प्रतिशत कारगर है, लेकिन यह विडम्बना हैं कि मरीज को दिक्क्त होने पर वह सीधे होम्योपैथिक चिकित्सक के पास नहीं जाता है, बल्कि सीधे एलोपैथिक चिकित्सक के पास पहुंचता है, जब वहां से ठीक नहीं होता, तब वह होम्योपैथी में वापस आता है। लेकिन तब तक समस्या दोहरी हो जाती है, पहली समस्या उसकी असल बीमारी होती है, जबकि दूसरी समस्या ड्रग डिजीज हो जाती है। यानी की दवाओं के साइडइफेक्ट हो जाते हैं।

ऐसे में किसी प्रकार की समस्या होने पर होम्योपैथी चिकित्सक से सलाह लेने में देर नहीं करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि होम्योपैथी दवा देर से नहीं बल्कि तत्काल असर दिखाती है। इस पैथी के साथ खास बात यह है कि इसका कोई साइडइफेक्ट नहीं होगा।

कार्यक्रम के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. आनंद चतुर्वेदी ने बताया कि इस कांफ्रेस का उद्देश्य था कि हम लोग डॉ.हैनिमैन के बताये हुये रास्ते पर चलने की सपथ लें, उन्होंने बताया कि 2 जुलाई डॉ.हैनिमैन की पुण्यतिथि होती है, डॉ.हैनिमैन का कार्य दो क्षेत्रों मे बहुत रहा है,पहला चिकित्सा दूसरा शोध। ऐसे में हमलोगों ने चिकित्सा के क्षेत्र में नई तकनीक को जोड़ते हुये इलाज के मार्ग बनायें, इसी पर शोध पत्र भी प्रस्तुत किये गये।

इस अवसर पर डॉ. लुबना कमाल, डॉ. प्रियंका भट्ट, डॉ. अमित मेहरोत्रा, डॉ. सी पी सिंह (चेयरमैन रिसर्च सोसायटी ऑफ होमियोपैथी), डॉ. एच. जी. जोशी (सचिव ए. पी. एम.पी.), डॉ. जे पी सिंह (पूर्व सहायक निदेशक एस डी आर आई), डॉ. वाई एन चौबे (चेस्ट स्पेशलिस्ट मेडॉक्स हॉस्पिटल) तथा डॉ. उपसम गोयल (नेत्र शल्य चिकित्सक टी सी आई सेंटर) तथा उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक समेत देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 1500 छात्रों एवं वैज्ञानिकों ने इस सम्मेलन में प्रतिभाग किया।

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