लखनऊ : कर्ज लेकर घर चलाने को मजबूर हैं शिक्षक, पांच महीने से नहीं मिली सैलरी

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लखनऊ, अमृत विचार। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है। यह योजना मार्च, 2009 में माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। लेकिन इस इस योजना के तहत संचालित विद्यालयों में वेतन समय से नहीं मिलने के कारण शिक्षकों की दुर्दशा खराब है। यह हाल …

लखनऊ, अमृत विचार। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है। यह योजना मार्च, 2009 में माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। लेकिन इस इस योजना के तहत संचालित विद्यालयों में वेतन समय से नहीं मिलने के कारण शिक्षकों की दुर्दशा खराब है। यह हाल राजधानी ही नहीं पूरे प्रदेश का है। शिक्षकों को पांच माह से वेतन नहीं मिला है। इसके चलते कई शिक्षक कर्ज लेने को मजबूर हैं। शिक्षकों की इस हालत को गुरुवार को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक आरधाना शुक्ला के सामने रखा गया। राजकीय शिक्षक संघ की ओर से दिए गए इस पत्र में मांग की गई कि शिक्षकों की आर्थिक स्थिति खराब है। ऐसे में तत्काल वेतन का भुगतान कराया जाना चाहिए।

रमसा विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों, शिक्षकों व प्रधानाचार्यों का कहना है कि लगातार वेतन नहीं मिलने से परेशानी हो रही है। कर्ज होने के चलते सामाजिक तौर पर रोज अपमानित हो रहे हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में रोज नये आदेश-निर्देश जारी हो रहे हैं केवल वेतन छोड़कर ऐसा लगता है कि शासन संवेदन शून्य है।

शिक्षकों के वेतन संबंधी फाइल फाइल वित्त विभाग की प्रबल सहमति के साथ मुख्यमंत्री के अनुमोदन के लिए भेजी गई है, लेकिन अभी इस पर कोई आदेश निर्देश नहीं मिला है। अब एक बार फिर अपर मुख्य सचिव से मांग की गई है कि वेतन का भुगतान कराया जाना चाहिए।

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