श्रीलंका की राह पर

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Edited By Amrit Vichar
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पड़ोसी देश नेपाल में आर्थिक एवं राजनीतिक संकट छाया हुआ है। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा सरकार कुशासन को लेकर अपनों के बीच घिर गई है। विपक्षी नेता केपी ओली ने कहा कि देउबा की गठबंधन सरकार मर चुकी है। जबकि नेपाली कांग्रेस के देउबा विरोधी धड़े ने संविधान में बदलाव करने की योजना का खुलकर …

पड़ोसी देश नेपाल में आर्थिक एवं राजनीतिक संकट छाया हुआ है। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा सरकार कुशासन को लेकर अपनों के बीच घिर गई है। विपक्षी नेता केपी ओली ने कहा कि देउबा की गठबंधन सरकार मर चुकी है। जबकि नेपाली कांग्रेस के देउबा विरोधी धड़े ने संविधान में बदलाव करने की योजना का खुलकर विरोध किया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक ओली ने चेतावनी दी कि अगर सरकार की गतिविधियां ऐसे ही चलती रहीं तो नेपाल श्रीलंका की राह पर जा सकता है। पिछले दिनों नेपाल राष्ट्र बैंक के पूर्व गवर्नर दीपेंद्र बहादुर छेत्री ने कहा कि अगर देश के राजनीतिक अधिकार गलत व्यक्तियों को दे दिए जाएंगे तो यहां की अर्थव्यवस्था भी श्रीलंका की राह पर जा सकती है।

आमतौर पर दो पड़ोसी देशों के बीच रिश्ते कारोबारी और कूटनीतिक होते हैं। सीमाएं जुड़ी होती हैं, लेकिन भारत और नेपाल के बीच रिश्ता इन सबसे अलग है। भारत की अति महत्वपूर्ण उत्तरी सीमा से सटा नेपाल सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। भारत के उत्तर में ही चीन की सीमा भी लगती है।

सच्चाई है कि भारत के लिए नेपाल एक बफर राज्य के रूप में कार्य करते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। नेपाल की भू-रणनीतिक स्थिति ने भारत तथा चीन के बीच रस्साकशी की स्थिति पैदा कर दी है। नेपाल में इस वक्त विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी हो गई है।

महंगी दर पर विदेशों से सामान आयात करने के चलते नेपाल के विदेशी मुद्रा भंडार में 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इस वजह से यहां की सरकार ने 10 सामानों के आयात पर रोक लगा दी है। इस पर्वतीय देश ने श्रीलंका जैसे हालात नहीं होने का भरोसा दिलाते हुए नकदी संकट और घटते विदेशी मुद्रा भंडार का हवाला देते हुए दो सार्वजनिक अवकाशों की भी घोषणा की है।

कोविड की वजह से पर्यटन कारोबार को भी गहरा धक्का लगा है। कोविड के समय से नेपाल-चीन के बीच मतभेद हुए हैं जिसका फायदा भारत अपनी उपस्थिति से उठा रहा है। नेपाल, भारत से लगभग 8 बिलियन डॉलर के उत्पादों का आयात करता है, जबकि नेपाल द्वारा भारत को निर्यात किए जाने वाले कुल उत्पादों की लागत एक बिलियन डॉलर से कम है।

व्यापार एवं निवेश के मामले में भारत को और अधिक उदारता दिखानी होगी। क्योंकि नेपाल की अस्थिरता सुरक्षा की दृष्टि से भारत के लिए चिंता का विषय है। इसलिए वहां जल्द ही स्थिति का सुधरना आवश्यक है।