सकारात्मक एजेंडा
भारत में एकीकृत फूड पार्क की स्थापना पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दो अरब डॉलर का निवेश करेगा। चार देशों के समूह ‘आई 2 यू 2’ के पहले शिखर सम्मेलन में हुए इस आशय के समझौते पर कहा जा सकता है कि यूएई का पैसा, इजरायल की तकनीक और भारत में बदलेगी किसानी की तस्वीर। …
भारत में एकीकृत फूड पार्क की स्थापना पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दो अरब डॉलर का निवेश करेगा। चार देशों के समूह ‘आई 2 यू 2’ के पहले शिखर सम्मेलन में हुए इस आशय के समझौते पर कहा जा सकता है कि यूएई का पैसा, इजरायल की तकनीक और भारत में बदलेगी किसानी की तस्वीर। इससे दक्षिण एशिया एवं पश्चिम एशिया में खाद्य असुरक्षा से निपटा जा सकेगा। गुरुवार को सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बढ़ती हुई वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ‘आई 2 यू 2’ समूह व्यावहारिक सहयोग का एक अच्छा मॉडल है, जिसकी पहली ही बैठक में एक ‘‘सकारात्मक एजेंडा’’ स्थापित कर लिया गया है।
विश्वास है कि ‘आई 2 यू 2’ से हम वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान करेंगे। इसमें ‘आई’ भारत और इजराइल के लिए और ‘यू’ अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात के लिए है। ‘आई 2 यू 2’ का गठन अक्टूबर 2021 में इज़रायल और यूएई के बीच अब्राहम समझौते के बाद किया गया था, ताकि इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और परिवहन से संबंधित मुद्दों से निपटा जा सके। अब्राहम समझौते की बदौलत भारत और पश्चिम एशियाई क्षेत्र के बीच रक्षा मोर्चे पर कुछ विकास हुआ है। भारत के अब पहले की तुलना में इजरायल और खाड़ी देशों के साथ मजबूत, बहुआयामी और बढ़ते सामाजिक आर्थिक संबंध हैं।
खाड़ी देशों के लिए मानव संसाधन, खाद्य उत्पादों, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न, आभूषण और हल्की इंजीनियरिंग वस्तुओं का भारत पसंदीदा स्रोत है। उस समय इसे ‘आर्थिक सहयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंच’ कहा जाता था। इसे ‘पश्चिमी एशिया का क्वाड’ भी कहा जाता था। आई 2 यू 2 में समुद्री सुरक्षा पर चर्चा को चीन अपने खिलाफ मानता है क्योंकि चीन दक्षिण चीन सागर के 90 फीसदी इलाके पर अपना दावा करता है। अमेरिका इसी का विरोध करता है।
क्या आई 2 यू 2 चीन की विस्तारवादी नीति को चुनौती देने के लिए बनाया गया है। इस दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि है जो इस क्षेत्र में होने वाले भू-राजनीतिक परिवर्तनों को दर्शाती है। कहा जा सकता है कि इस समूह से भारत को फायदा होगा। यह भारत को राजनीतिक और सामाजिक गठबंधन निर्मित करने में मददगार साबित होगा। इस नए समूह में इजरायल यूरोप को जोड़ने वाला एक पुल है और भारत पूरे संदर्भ में एक और बड़ा व्यापारिक भागीदार है। इस लिहाज से देखें तो यह बाजी पलटने वाला साबित होगा। वैसे भी बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद इस गठबंधन की अहमियत काफी बढ़ गई है।
