विकास की उम्मीद

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Edited By Amrit Vichar
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जिस तरीके से बुन्देलखंड इलाका अभी तक विकास की धारा से अलग-थलग पड़ा था, यहां खेती उद्योग और रोजगार की बात तो छोड़िए, पीने का पानी तक नहीं था। वहां 496 किलोमीटर का एक्सप्रेस वे बना देना निश्चित रूप से किसी ख्वाब की ताबीर से कम नहीं है। इस एक्सप्रेस वे को विकास का एक्सप्रेस …

जिस तरीके से बुन्देलखंड इलाका अभी तक विकास की धारा से अलग-थलग पड़ा था, यहां खेती उद्योग और रोजगार की बात तो छोड़िए, पीने का पानी तक नहीं था। वहां 496 किलोमीटर का एक्सप्रेस वे बना देना निश्चित रूप से किसी ख्वाब की ताबीर से कम नहीं है। इस एक्सप्रेस वे को विकास का एक्सप्रेस वे कहा जाना उचित है।

आने वाले समय में बुन्देलखंड का यह एक्सप्रेस वे यहां के विकास की कहानी लिखेगा। सही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी इच्छाशक्ति के बदौलत बुन्देलखंड में विकास की गाथा लिखने के संकल्प को पूरा कर दिया है। 14,800 करोड़ रूपए की लगात से निर्मित होने वाले इस एक्सप्रेस वे को छह लेन तक किया जा सकेगा।

अभी यह चार लेन का ही है। इस एक्सप्रेस वे का अप्रत्यक्ष फायदा तो पूरे देश को मिलेगा, किन्तु उत्तर प्रदेश के सात जिले और मध्यप्रदेश के छह जिलो के लिए तो यह एक तरीके से वरदान ही है। इस एक्सप्रेस वे के किनारे 20,000 करोड़ रूपए की लागत से रक्षा कोरीडोर बनाया जाएगा। रक्षा कोरीडोर भी मोदी सरकार का पुराना सपना था जो कि हकीकत में तब्दील होता दिख रहा है।

रक्षा कोरिडोर से जहां एक ओर सेना को स्वदेश निर्मित उपकरण और सामग्री मिलेगी, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। बांदा और जालौन में औद्योगिक कोरीडोर भी बनाया जाएगा। बुन्देलखंड की प्यासी धरती से महानगरों की ओर पलायन का दर्द यहां के लोकगीतों और लोककथाओं से रिसता रहा है।

वह पलायन अब बंद होगा तथा बुन्देलखंड की जवानी बुन्देलखंड के काम आएगी। वीर बुन्देलों की यह धरती राजनीतिक उपेक्षा का शिकार रही है, लेकिन अब इस एक्सप्रेस वे के बन जाने के बाद इसके मुख्यधारा में आने में समय नहीं लगेगा। बुन्देलखंड शुरु से ही पर्यटन का केन्द्र रहा है। अब यह पर्यटन की दृष्टि से अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर आ जाएगा।

वन बहुल क्षेत्र होने के कारण विकास को और गति मिलेगी। विकास के क्षेत्र में अभी तक जो गतिरोध था, इस एक्सप्रेस वे के बन जाने के बाद वह अब दूर हो जाएगा। प्रकृति को अगर इस बात का श्रेय है कि उसने बुन्देलखंड को हीरे से नवाजा है, वनों और दुर्लभ जड़ी बूटियों से समृद्ध किया है, तो इस एक्सप्रेस वे को निश्चित रूप से इस बात का श्रेय होगा कि इसने यहां समावेशी और टिकाऊ विकास की पटकथा लिखी।