बरेली: 43 हजार वर्ग मीटर जमीन का बैनामा पर कब्जा नहीं ले पाया निगम
बरेली, अमृत विचार। प्रलोभन में आकर पूर्व नगर आयुक्त जांच में फंस गए हैं। रिटायरमेंट के बाद उनकी पेंशन भी रुकी है। वह किस हाल में होंगे यह तो वही जाने, लेकिन नगर निगम में मौजूदा अफसरों को वे असमंजस में फंसा गए हैं। हालत यह है कि नगर निगम के नाम लगभग चार हेक्टेयर …
बरेली, अमृत विचार। प्रलोभन में आकर पूर्व नगर आयुक्त जांच में फंस गए हैं। रिटायरमेंट के बाद उनकी पेंशन भी रुकी है। वह किस हाल में होंगे यह तो वही जाने, लेकिन नगर निगम में मौजूदा अफसरों को वे असमंजस में फंसा गए हैं। हालत यह है कि नगर निगम के नाम लगभग चार हेक्टेयर भूमि का बैनामा हो गया है, लेकिन निगम उस पर कब्जा नहीं ले पा रहा है।
उस भूमि पर कब्जा लेने का कभी प्रयास तक नहीं किया गया। जमीन खाली पड़ी है। यहां बेरीकेडिंग तक निगम नहीं कर पाया है। यह भूमि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए ऐसी जगह ली गई जहां पहुंचने के लिए निगम को ज्यादा डीजल खर्च करना पड़ेगा । कुछ दूरी पर नदी है और पास में मंदिर भी है।
बहगुलपुर गांव में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए पूर्व नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव के कार्यकाल में जमीन खरीदी गई थी। जमीन लेने की अगुवाई पूर्व नगर आयुक्त ही कर रहे थे, लेकिन उन्होंने राज्यपाल के नाम दान मिल रही जमीन के लिए राज्यपाल से मंजूरी नहीं ली। मंजूरी मिल गई होती तो राज्यपाल के नाम से ही जमीन ली गई होती और उस समय यदि स्टांप शुल्क की कमी होती तो नगर निगम उसे भरता। लेकिन यहां तो इंवर्टिस विश्वविद्यालय से राशि जमा की गई। यही वजह है कि नगर आयुक्त ने स्वयं रजिस्ट्री नहीं की बल्कि सुरेन्द्र सोनकर से करवाई।
नगर निगम के नाम इस गांव की लगभग चार हेक्टेयर भूमि है। इसमें अधिकांश किसान खेती नहीं कर रहे हैं। जिस जगह कचरा फैक्ट्री के लिए जमीन ली गई। पास में ही मंदिर है। सूत्र बताते हैं 21 बैनामे हुए हैं। नौ किसानों की भूमि ऐसी है जिन्हें बेचा नहीं जा सकता। यानि वे असंक्रमणीय भूमिधर है।
मामले की जांच चल रही है। जांच में जो निष्कर्ष होगा। उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसलिए उस भूमि पर अभी निगम कुछ नहीं कर रहा है—अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त।
निगम के भी विद्वान अधिवक्ता हैं। उनसे ही निगम यह जानकारी कर लेता कि दान व विनिमय के तथ्य क्या हैं। क्या जमीन लेने में उनका ध्यान रखा गया है। पूरी स्थिति साफ हो जाएग—राजेश तिवारी, पूर्व पार्षद।
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