सामूहिक सहभागिता
दुनिया भर में लाखों महिलाएं, पुरुष और बच्चे स्वच्छ पानी के अभाव में जीवनयापन करने को मजबूर हैं। भारत में, लगभग 90 करोड़ लोग देश के 6 लाख गांवों में रहते हैं। इस आबादी के लगभग 45 प्रतिशत हिस्से को यानि लगभग 40 करोड़ लोगों को यह महत्वपूर्ण संसाधन उपलब्ध नहीं है। जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य …
दुनिया भर में लाखों महिलाएं, पुरुष और बच्चे स्वच्छ पानी के अभाव में जीवनयापन करने को मजबूर हैं। भारत में, लगभग 90 करोड़ लोग देश के 6 लाख गांवों में रहते हैं। इस आबादी के लगभग 45 प्रतिशत हिस्से को यानि लगभग 40 करोड़ लोगों को यह महत्वपूर्ण संसाधन उपलब्ध नहीं है। जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित, आसानी से उपलब्ध पानी महत्वपूर्ण है। जल आपूर्ति स्वच्छता और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार जब पानी बेहतर और अधिक सुलभ स्रोतों से आता है, तो लोग इसे भौतिक रूप से इकट्ठा करने में कम समय और प्रयास खर्च करते हैं, जिसका अर्थ है कि वे अन्य तरीकों से उत्पादक हो सकते हैं। बेहतर जल स्रोतों का मतलब स्वास्थ्य पर कम खर्च भी है, क्योंकि लोगों के बीमार होने और चिकित्सा लागतों को कम करने की संभावना कम होती है और वे आर्थिक रूप से उत्पादक बने रहने में सक्षम होते हैं।
इसी के चलते केंद्र सरकार ने 2024 तक भारत के सभी ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त, सुरक्षित और विश्वसनीय पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ‘जल जीवन मिशन’ शुरू किया। उत्तर प्रदेश में परियोजना 137 गांवों पर केन्द्रित है, जहां लोग अत्यधिक गरीबी का जीवन जीते हैं और पानी की कमी व प्रदूषण के गंभीर मसलों का सामना करते हैं। मिशन के लिए रणनीतिक तकनीकी और प्रशिक्षण सहायता प्रदान करने के लिए सरकार ने डेनमार्क के साथ हाथ मिलाया है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि 50 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण घरों में नल के पानी की आपूर्ति की जा रही है। मिशन के हवाले के अनुसार, 10 जून, 2022 तक देश भर में लगभग 9.65 करोड़ घरों (50.38 प्रतिशत) के पास नल के पानी के कनेक्शन हैं। इसे 100 प्रतिशत पर पहुंचाना एक चुनौती है, जो सामुदायिक सहभागिता के बिना संभव नहीं है। जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और शहरीकरण पहले से ही जल आपूर्ति प्रणालियों के लिए चुनौतियां हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ़ के संयुक्त निगरानी कार्यक्रम के नए आकड़े बताते हैं कि सार्वभौमिक सुरक्षित रूप से प्रबंधित सेवाओं को प्राप्त करने के लिए सुधार के मौजूदा प्रयासों को चार गुना करने की आवश्यकता होगी। साथ ही ध्यान देना होगा कि जल संरक्षण और जल प्रबंधन एक-दूसरे के पूरक हैं। बिना जल संरक्षण किए अगर हम जल का दोहन करेंगे, तो आने वाले समय में जल संकट की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। मिशन की सफलता के लिए जन आंदोलन एवं उचित प्रशिक्षण को सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
