बरेली: टूटे-फूटे फ्रिज से वैज्ञानिकों ने बनाया एग इंक्यूबेटर, जानें फीचर्स
बरेली, अमृत विचार। छोटे मुर्गी पालकों के लिए कम कीमत में अधिक लाभ दिलाने के उद्देश्य से केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से टूटे-फूटे रेफ्रिजेरेटर से इंक्यूबेटर तैयार किया गया है। जिससे अधिक मात्रा में अंडों की सिकाई की जा सकेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार एक बार में एक मुर्गी 12-15 अंडों को ही …
बरेली, अमृत विचार। छोटे मुर्गी पालकों के लिए कम कीमत में अधिक लाभ दिलाने के उद्देश्य से केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से टूटे-फूटे रेफ्रिजेरेटर से इंक्यूबेटर तैयार किया गया है। जिससे अधिक मात्रा में अंडों की सिकाई की जा सकेगी। वैज्ञानिकों के अनुसार एक बार में एक मुर्गी 12-15 अंडों को ही हैच कर पाती है। इसकी संख्या को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक मशीन की कीमत लगभग 2-2.5 लाख रुपये है। इसलिए टूटे फ्रिज से इंक्यूबेटर बनाकर उसमें 400-600 अंडों को एक साथ हैच किया जा सकता है। इसके लिए करीब 5 से 8 हजार रुपये की लागत लगानी पड़ेगी, जो कि मुर्गी पालकों के लिए मुनासिब दाम हैं।
केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक एवं फिजियोलॉजी एंड रिप्रोडक्शन के विभागाध्यक्ष डा. जगवीर सिंह त्यागी ने बताया कि लो कॉस्ट इंक्यूबेटर फ्रॉम रिसाइकिल बेस्ड प्रोजेक्ट के तहत इस इंक्यूबेटर को बनाने का काम वर्ष 2018 में शुरू किया गया था। इसको बनाने के लिए कबाड़ की दुकानों पर बिक्री के लिए रखे फ्रीज की बॉडी को इस्तेमाल किया जाता है।
इसमें एक तापमान बरकरार रखने के लिए एक हीटर, पुराना पंखा, निरंतर पावर सप्लाई के लिए यूपीएस बैटरी, नमी के लिए पांच लीटर की कैन और तापमान मापने के लिए थर्मामीटर का प्रयोग किया गया है। उन्होंने बताया कि रिसाइकल प्रोडक्ट के प्रयोग से छोटे किसान इसे अपने घर के बैकयार्ड में लगा सकते हैं। इससे उनकी लागत में कमी के साथ ही आय दोगुनी होगी।
3-5 घंटे के भीतर पलटने होंगे अंडे
मुर्गीपालकों को ये इंक्यूबेटर इस्तेमाल करने में कुछ सावधानियां बरतनी होंगी। इसमें अंडों को करीब 3-5 घंटे के अंतराल में अंडों को पलटना आवश्यक है। जिससे अंडे के भीतर मौजूद भ्रूण को भरपूर मात्रा में गर्माहट मिल सके। इससे भ्रूण के विकास में वृद्धि बेहतर होती है। हालांकि, वैज्ञानिकों के अनुसार मुर्गियों को भी हैच करने के लिए 21 दिन लगते हैं। वहीं, इंक्यूबेटर में अंडों को भी 21 दिन हैच करने से उनको आवश्यक पोषण मिल जाता है। इसको कृत्रिम हैचिंग भी कहते हैं।
जल्द ही उत्पाद का किया जाएगा व्यवसायीकरण
डा. जगवीर सिंह त्यागी ने बताया कि जल्द ही उत्पाद का व्यवसायीकरण किया जाएगा। इसको लेकर पंजीकरण की प्रक्रिया संस्थान की ओर से जारी है। जल्द ही पंजीकरण होने के बाद इस तकनीक का इस्तेमाल आमजन के लिए भी होने लगेगा। इस दौरान इसका मूल्य का भी निर्धारण किया जाएगा।
ये भी पढ़ें – बरेली: लंबी मालगाड़ियों के लिए रसुइया स्टेशन का होगा विस्तार
