मुरादाबाद : फौजी की बेटी ने मौसा के मंसूबे पर फेरा पानी, जानें पूरा मामला

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मुरादाबाद,अमृत विचार। शहर में रहने वाले एक फौजी की नाबालिग बेटी ने अपने मौसा के मंसूबे पर पानी फेरते हुए सच स्वीकार लिया है। अमरोहा बाल कल्याण समिति के समक्ष फौजी को अपना पिता बता कर नाबालिग ने न सिर्फ वर्षों से तड़प रहे मां-बाप को राहत दी है, बल्कि नाबालिग को हथियाने के मौसा …

मुरादाबाद,अमृत विचार। शहर में रहने वाले एक फौजी की नाबालिग बेटी ने अपने मौसा के मंसूबे पर पानी फेरते हुए सच स्वीकार लिया है। अमरोहा बाल कल्याण समिति के समक्ष फौजी को अपना पिता बता कर नाबालिग ने न सिर्फ वर्षों से तड़प रहे मां-बाप को राहत दी है, बल्कि नाबालिग को हथियाने के मौसा के मंसूबे पर पानी भी फेर दिया है। सच के पाले में खड़ी नाबालिग के रुख को भांपते हुए उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। डीएम अमरोहा के अलावा यूपी के डीजीपी व डीआईजी मुरादाबाद को पत्र लिखकर नाबालिग को एक हफ्ते में कानूनी संरक्षक के सुपुर्द करने का सख्त आदेश दिया है।

आरोपी दंपती ने सरकारी अभिलेखों में भी की थी हेराफेरी
मझोला में रहने वाले एक फौजी की बीवी तीन माह पहले बाल संरक्षण आयोग मुरादाबाद के समक्ष पेश हुई। महिला ने अमरोहा की रहने वाली बड़ी बहन व बहनोई पर अपनी बड़ी बेटी को हथिया लेने का आरोप मढ़ा। महिला ने बताया कि उसकी 15 वर्षीय बेटी को हथियाने के लिए आरोपी दंपती ने सरकारी अभिलेखों में भी हेराफेरी की। प्रकरण की गंभीरता भांप बाल कल्याण समिति ने अमरोहा के दंपती को तलब किया। पेशी की चार तिथि निर्धारित होने के बाद भी दंपती मुरादाबाद नहीं पहुंचे। इस बीच फौजी व उसकी पत्नी बेटी के वियोग में दर-दर की ठोकर खाते रहे। उन्होंने सीएम पोर्टल से लेकर बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक के चौखट पर दस्तक दी। महीनों भटकने के बाद भी फौजी व उसकी बीवी की गुहार नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह गई। मुरादाबाद से लेकर अमरोहा तक प्रशासनिक अमला टालमटोल करने लगा। ऐसे में न्याय पाने की फौजी की राह कठिन होती गई।

सीडब्ल्यूसी के समक्ष किशोरी ने फौजी को जैविक पिता बताया
उधर, शातिर मौसा ने अमरोहा बाल कल्याण समिति के सदस्यों को अपने पाले में खड़ा कराने की जुगत लगाता रहा। मंसूबे में सफल मौसा ने अमरोहा सीडब्ल्यूसी से नाबालिग की अस्थाई सुपुर्दगी अपने पक्ष में करा ली। इसके बाद अमरोहा व मुरादाबाद सीडब्ल्यूसी की आंख में धूल झोंकते हुए उसने परिवार न्यायालय अमरोहा में वाद दाखिल कर दिया। साढू की कारगुजारी से फौजी हताश नहीं हुआ। वह बाल अधिकार संरक्षण आयोग के संपर्क में रहा। इस बीच फौजी की पत्नी ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष अमरोहा सीडब्ल्यूसी का एक पत्र पेश किया। सीडब्ल्यूसी के समक्ष दर्ज कराए बयान में किशोरी ने फौजी को अपना जैविक पिता बताया। किशोरी की स्वीकारोक्ति ऊहापोह व असमंजस की स्थिति खत्म करने का सबब बनी।

एक हफ्ते में सुपुर्दगी सुनिश्चित करने का है आदेश
किशोरी के बयान को आधार बनाते हुए उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने डीएम अमरोहा, डीजीपी व डीआईजी मुरादाबाद समेत एक दर्जन अधिकारियों को पत्र लिखा। किशोरी को उसके कानूनी संरक्षक के सुपुर्द करने का आदेश दिया गया। 27 जुलाई को जारी आदेश में आयोग ने एक हफ्ते में सुपुर्दगी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग के रुख से फौजी को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

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