इटावा : भाई-बहन के स्नेह को संजो रहे मूकबधिर बच्चे… जानें इनका हुनर
इटावा । आशा निकेतन मिशनरी स्कूल में पढ़ने वाले मूकबधिर बच्चे भाई-बहन के स्नेह को संजोने का काम कर अपना हुनर पेश कर रहे हैं। बता दें कि बच्चे कुशल कारीगरों की तरह राखियां बना रहे हैं। राखियों को मिशनरी स्कूलों में भेजकर ब्रिकी की जाती है और यह रूपया इन मूकबधिर बच्चों की पढ़ाई …
इटावा । आशा निकेतन मिशनरी स्कूल में पढ़ने वाले मूकबधिर बच्चे भाई-बहन के स्नेह को संजोने का काम कर अपना हुनर पेश कर रहे हैं। बता दें कि बच्चे कुशल कारीगरों की तरह राखियां बना रहे हैं। राखियों को मिशनरी स्कूलों में भेजकर ब्रिकी की जाती है और यह रूपया इन मूकबधिर बच्चों की पढ़ाई में लगाया जाता है।
बताते चलें कि दिव्यांगता को दरकिनार कर यह बच्चे अपने हुनर का प्रदर्शन कर रहे हैं। बच्चे राखी बनकर भाई-बहन के असीम प्रेम की खुशियों को दोगुना करने में दिन रात मेहनत कर रहे हैं। तो वहीं बच्चों की इस प्रतिभा को आशा निकेतन के संचालक भी बाखूबी समझते है। वह इन बच्चों को प्रोत्साहित करने के अलावा इन राखियों की बिक्री से होने वाले लाभ में भी हिस्सेदारी दे रहे हैं।
बता दें कि जिले में आशा निकेतन सेंट मैरी संस्था की ओर से संचालित की जा रही है। इस विद्यालय में 50 मूकबधिर बच्चे पढ़ाई कर रहे है। जिनमें कुछ राखी और कैंडल बनाने का भी हुनर रखते हैं। वहीं रक्षाबंधन के अवसर पर इन दिनों निकेतन में बच्चे राखी बनाने में जुटे है। प्रिंसिपल लिमा का कहना है कि बच्चों के हुनर के साथ ही उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए भी राखी प्रतियोगिता की जा रही हैं। जिससे बच्चे अधिक से अधिक इस कला को आगे बढ़ा सके।
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