अयोध्या : निगम में शामिल नए 41 गांवों की जमीन पर भू-माफिया ने लगायी निगाहें, गठजोड़ से करेंगे बड़ा खेल

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अयोध्या, अमृत विचार। अयोध्या नगर निगम सीमा का विस्तार भूमाफिया, राजस्व विभाग व विकास प्राधिकरण के गठजोड़ के लिए ‘खेल ‘ का नया मैदान साबित हो रहा है। शहरी क्षेत्र में जमीनों की खरीद – फरोख्त का धंधा चमकाने के बाद अब निगम में नए शामिल 41 गांवों की सरकारी जमीनों तक पर इस काकस …

अयोध्या, अमृत विचार। अयोध्या नगर निगम सीमा का विस्तार भूमाफिया, राजस्व विभाग व विकास प्राधिकरण के गठजोड़ के लिए ‘खेल ‘ का नया मैदान साबित हो रहा है। शहरी क्षेत्र में जमीनों की खरीद – फरोख्त का धंधा चमकाने के बाद अब निगम में नए शामिल 41 गांवों की सरकारी जमीनों तक पर इस काकस की नजर गड़ गई है। जिसके चलते इन गांवों के लेखपालों के सहारे सरकारी भूमि पर कब्जे की कवायद शुरू हो गई है। यही नहीं एक मामलें में तो तहसील के कारिदों ने भूमि की नव्वैयत तक बदल डाली।

अमृत विचार द्वारा शहरी क्षेत्र में इस गठजोड़ के सुनियोजित खेल का खुलासा करने के बाद काकस ने निगम में शामिल नए 41 गांवों की ओर हाथ फैलाने शुरू कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार गठजोड़ ने इसके लिए बाकायदा तहसील से शहरी क्षेत्र में शामिल गांवों का नक्शा नजरी निकलना शुरू कर दिया है। किस ग्राम सभा में तालाब, परती, बंजर, चारागाह और खलिहानों की कितनी जमीनें हैं इसका ब्योरा जुटाया जा रहा है।

इन जमीनों पर कब्जे के लिए भूमाफिया और प्राधिकरण, राजस्व के गठजोड़ ने वहां अवैध कब्जे का रास्ता बनाना शुरू कर दिया है। जिसके चलते इन गांवों के लेखपालों की भी चांदी हो गई है। बताया जाता है कि गुरु नानक महिला महाविद्यालय आगे नहर के किनारे एक तालाब पर तो कब्जा शुरू हो चुका है वहीं इलाहाबाद हाईवे पर एक कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली फैक्ट्री के निकट स्थित तालाब भी अवैध कब्जे की जद जकड़ में है। बताया जाता है कि जिन 41 गांवों को शामिल कर निगम के विभिन्न वार्डों में समाहित किया गया है वहां काकस के गुर्गे कब्जा की सरकारी जमीनों के सर्वे में तक में लगे हुए हैं।

निगम में शामिल होने के बाद यह गांव अब प्राधिकरण के दायरे में भी आ गए हैं इसलिए शहर के अंदरुनी हिस्से वाला खेल अब इन इलाकों में शुरू कर दिया गया है। कई इलाकों में तो अवैध रूप से प्लाटिंग के लिए ऐसी जमीनों की पटाई और झुग्गी झोपड़ी रखने का काम भी शुरू कर दिया गया है।

सूत्रों की मानें तो इस खेल में बीकापुर के एक नामचीन भी शामिल हैं जो सरकारी जमीनों की हेराफेरी का मास्टर माइंड बताया जाता है। तहसील से मिल कर जमीनों की हेराफेरी के इस धुरंधर ने अब तक 50 से अधिक जमीनों को लेकर अपनी कानूनी बाजीगरी दिखाई है। एक सम्मानित पेशे से जुड़े इस मास्टर माइंड के हाथ इतने लम्बे हैं कि आज तक इन्हें कोई छू भी नहीं सका है। लोगों का कहना है कि जमीनों को लेकर यह ऐसी हाथ की सफाई दिखाते हैं कि जैसे राजस्व विभाग इनकी जेब में रहता है।

लाल डिग्गी तालाब तक अवैध कब्जे से नहीं अछूती
शहर की जिस लाल डिग्गी ताल पर सरकार लाखों खर्च कर सरोवर बनवा रही है वह भी अवैध कब्जे से अछूती नहीं है। कई एकड़ में फैले लाल डिग्गी तालाब पर अवैध कब्जे खुली आंखों से नजर आते हैं। जिनमें एक स्कूल, एक हास्पिटल और आवासीय निर्माण शामिल हैं। यही कारण है कि सिमट कर कुछ एकड़ बचे इस तालाब में सरोवर का निर्माण हो रहा है। खुद तहसील प्रशासन अवैध कब्जे की बात स्वीकारता है लेकिन कार्रवाई के सवाल पर चुप्पी साध जाता है।

भू-माफिया के लिए बदल दी 20 करोड़ की भूमि की नव्वैयत
एक चौकानें वाला और खुलासा हुआ है। जिसमें बीस करोड़ की चारागाह की भूमि की नव्वैयत भू-माफिया और अफसरों की मिलीभगत से बदल दी गई। इसकी शिकायत गनेशपुर निवासी प्रकाश कुमार गुप्ता ने की है। मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में उन्होंने कहा है कि गाटा संख्या 446 रकबा 0.1070 चारागाह में दर्ज है। जिसकी नव्वैयत बदलने का अधिकार न डीएम न चकबन्दी को है। इसके बाद भी भू-माफिया को लाभ पहुंचाने के लिए भूमि श्रेणी 3 आसामी के रुप में दूसरे के नाम दर्ज कर दी गई। शिकायत कर्ता का आरोप है कि इसके पीछे भी लम्बा खेल खेला गया लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि पूरी कार्रवाई नियमों के विपरीत हुई। इसी को लेकर अब उन्होंने मुख्यमंत्री से शिकायत कर जांच की मांग की है। बताते हैं कि इसकी जांच ठीक से हुई तो कई अफसर नपेगें।

बोले जिम्मेदार
नगर निगम में शामिल गांवों की सरकारी भूमि पर अभी किसी तरह के कब्जे की सूचना नहीं है। यदि कहीं ऐसा होता है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
राजकुमार पांडेय, तहसीलदार, सदर तहसील

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