चम्पावत: देवीधुरा के बाराही मंदिर में कल खेली जाएगी बग्वाल
देवेन्द्र चन्द देवा, अमृत विचार, चंपावत। देश भर में प्रसिद्ध जनपद चम्पावत के देवीधुरा के मां बाराही मंदिर में बग्वाल मेले का भले ही आठ अगस्त से शुभारंभ हो गया है लेकिन मेले का मुख्य आकर्षण रक्षाबंधन पर्व पर यानी 12 अगस्त को बग्वाल रहेगी। इस दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बतौर मुख्य अतिथि रहेंगे। …
देवेन्द्र चन्द देवा, अमृत विचार, चंपावत। देश भर में प्रसिद्ध जनपद चम्पावत के देवीधुरा के मां बाराही मंदिर में बग्वाल मेले का भले ही आठ अगस्त से शुभारंभ हो गया है लेकिन मेले का मुख्य आकर्षण रक्षाबंधन पर्व पर यानी 12 अगस्त को बग्वाल रहेगी। इस दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बतौर मुख्य अतिथि रहेंगे।
पिछले 2 वर्ष से लगातार कोरोना महामारी के कारण बग्वाल मेले का आयोजन नहीं हो पाया था। इन दो वर्षों में प्रतीकात्मक तौर पर बग्वाल मेला का आयोजन किया गया था। अलबत्ता चम्पावत जिला पंचायत द्वारा संचालित इस मेले में रक्षाबंधन पर्व पर इस बार लाखों की संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
टनकपुर से करीब 132 किलोमीटर दूर चम्पावत जनपद के पाटी ब्लॉक के देवीधुरा में मां बाराही धाम मंदिर के खोलीखांड दुबाचौड़ में हर साल अषाढ़ी कौतिक यानी रक्षाबंधन के दिन बग्वाल होती है। पत्थर से शुरू यह बग्वाल बीते कुछ वर्षों से फल फूलों से खेली जाती रही है। इस बार बग्वाल 12 अगस्त रक्षाबंधन के दिन प्रस्तावित है।
लाखों लोगों की मौजूदगी में होने वाली बग्वाल में 4 खामो चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग के अलावा सात थोकों के योद्धा फरों के साथ हिस्सा लेते हैं। रक्षाबंधन पर्व पर यहां देश ही नहीं विदेश से भी दर्शक मेले का लुफ्त उठाने पहुंचते हैं।
इस बार यह मेला आठ अगस्त से 19 अगस्त तक रखा गया है। इधर, मां बाराही धाम के पीठाचार्य पंडित कीर्ति बल्लभ जोशी और मंदिर कमेटी के अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया का कहना है कि पिछले दो वर्ष कोरोना महामारी के कारण मेला खासा प्रभावित रहा था लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर्व पर उम्मीद है कि लाखों की संख्या में दर्शक यहां मेला देखने पहुंचेंगे।
बलि प्रथा का विकल्प है बग्वाल
चम्पावत। चारों खामों के लोग पूर्णिमा के दिन पूजा अर्चना के बाद बग्वाल खेलते हैं। किवदंती है कि पूर्व में यहां नरबलि देने का रिवाज था लेकिन जब चम्याल खाम की एक बुजुर्ग महिला के एकमात्र पौत्र की बलि देने की बारी आई तो वंश का नाश होने के डर से बुजुर्ग महिला ने मां बाराही की तपस्या की। तप से देवी मां के प्रसन्न होने पर वृद्धा की सलाह पर चारों खामों ने आपस में युद्ध कर इस परंपरा को आगे बढ़ाने की बात मान ली और तब से ही बग्वाल का सिलसिला चला आ रहा है।
बग्वाल मेले को आर्थिक मदद नहीं
चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित करने की पूर्व में घोषणा की जा चुकी है। जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय का कहना है कि भले ही मुख्यमंत्री द्वारा बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित किया है लेकिन अभी तक मेले को आर्थिक मदद प्रदान नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत अपने सीमित संसाधनों से मेले का आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा कि 12 अगस्त को मुख्यमंत्री के बग्वाल मेले में आने से उम्मीद है कि वह मेले के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी करेंगे।
