क्रांतिकारियों ने स्वराज्य व स्वधर्म को केंद्र में रखकर क्रांति की : डॉ. शरद रेणु

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प्रयागराज। भारत की स्वतंत्रता को अमर बनाने के लिए हमें उन्हें याद करने की आवश्यकता है, जिन्होंने हमें सिखाया “माता भूमि पुत्रोहं पृथिव्याः’’। देश की एकता व अखंडता को अक्षुण्ण बनाने के लिए हमें इतिहास से सबक लेना चाहिए। ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत के जनमानस का अध्ययन करके पाया कि भारत में अपनी संस्कृति …

प्रयागराज। भारत की स्वतंत्रता को अमर बनाने के लिए हमें उन्हें याद करने की आवश्यकता है, जिन्होंने हमें सिखाया “माता भूमि पुत्रोहं पृथिव्याः’’। देश की एकता व अखंडता को अक्षुण्ण बनाने के लिए हमें इतिहास से सबक लेना चाहिए। ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत के जनमानस का अध्ययन करके पाया कि भारत में अपनी संस्कृति व संस्कार के प्रति अत्यंत विश्वास है। भारत को खंडित करने के लिए उस पर कुठाराघात करना आवश्यक है।

क्रांतिकारियों ने स्वराज्य व स्वधर्म इन दो विषयों को केंद्र में रखकर क्रांति की। यह बातें मुख्य वक्ता राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख डॉ शरद रेणु ने मंगलवार को केपी कम्युनिटी हाल में सम्बोधित करते हुए कही। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के ऐतिहासिक वर्ष पर राष्ट्र सेविका समिति ने वर्ष पर्यंत राष्ट्र चेतना व जागृति के अनेक कार्यक्रम लिए। जिसके समापन अवसर पर उन्होंने अपने विचार व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि 1857 का स्वतंत्र समर विद्रोह नहीं बल्कि शुरुआत थी, भारत के स्वाधीनता की। किसी भी काम के लिए छोटे स्तर से ही यह चेतना का स्वरूप जागृत होता है। स्वामी दयानंद के “वेद की ओर लौटो“ का आशय यही था-अपने मूल चिंतन की ओर लौटो। केवल 100 वर्षों तक हमें एक ही देवता की आराधना करनी है। वह भारत माता जिससे हम पुनः विश्व गुरु के स्थान पर स्थापित हो सकेंगे। राष्ट्र सेविका समिति ने देश को अपने वास्तविक इतिहास से परिचित कराने का संकल्प लिया।

इसके पूर्व मुख्य अतिथि सृजन हॉस्पिटल की निदेशक व सदस्य लोक सेवा आयोग डॉ सविता अग्रवाल, कार्यक्रम की अध्यक्षा महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी, क्षेत्र प्रचारिका शशि, प्रांत कार्यवाहिका काशी प्रांत माया पांडेय ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन व दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विभाग कार्यवाहिका वंदना श्रीवास्तव ने मंच संचालन किया। अलका श्रीवास्तव, श्रद्धा तिवारी एवं प्रतीक्षा पांडे द्वारा स्वरचित कविता पाठ किया। 75 सेविका बहनों ने सामूहिक वंदे मातरम गायन किया। मॉमी डे, प्रिया तिवारी, पूनम मिश्रा, मंजू राव, अंजली शुक्ला, संध्या सिंह, अनुश्री तिवारी, आभा मिश्रा, भावना, सुधा, सुलोचना आदि सेविकाओं की उपस्थिति रही।

इस अवसर पर अमर शहीद नायक मनीष पांडे, वीर शहीद सूबेदार मेजर लालमणि यादव एवं अमर शहीद लांस नायक सूरज मिश्रा के परिवार को स्मृति चिह्न व अंगवस्त्रम् देकर सम्मानित किया गया। समिति की विभाग सम्पर्क प्रमुख मंजू दरबारी ने सभी का आभार व्यक्त किया। विभाग संचालिका उमा, विभिन्न सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी यथा दुर्गा वाहिनी, आरोग्य भारती, विद्या भारती, सेवा भारती, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, कुटुम्ब प्रबोधन, स्वदेशी जागरण मंच आदि की उपस्थिति में भारत माता की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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