बिगड़ता सुरक्षा माहौल
कश्मीर में आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में तेजी आई है। हाल के दिनों में आतंकवादी भी बड़े स्तर पर मारे गए हैं। मंगलवार को शोपियां जिले में एक और लक्षित हमले में आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडित की गोली मारकर हत्या कर दी। जिले में पिछले 15 घंटे के भीतर यह दूसरा लक्षित हमला है। आतंकवादियों …
कश्मीर में आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में तेजी आई है। हाल के दिनों में आतंकवादी भी बड़े स्तर पर मारे गए हैं। मंगलवार को शोपियां जिले में एक और लक्षित हमले में आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडित की गोली मारकर हत्या कर दी। जिले में पिछले 15 घंटे के भीतर यह दूसरा लक्षित हमला है।
आतंकवादियों ने इस साल लगभग 15 नागरिकों की लक्षित हत्याएं की हैं जिनमें ज्यादातर गैर स्थानीय और पंचायत सदस्य हैं। लक्षित हमलों में चार पुलिसकर्मियों की भी मौत हो गई है। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (केपीएसएस) का आरोप है कि पिछले 32 वर्षों में सरकार अल्पसंख्यकों खासतौर पर कश्मीरी पंडितों को सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रही है।
समिति ने हिंदू समुदाय के लोगों से घाटी छोड़ने की अपील की है। ये हत्याएं कश्मीर में बिगड़ते सुरक्षा माहौल की तरफ इशारा करती है। वहां के नागरिक, राजनीतिक कार्यकर्ता और निहत्थे सुरक्षाकर्मी हिंसा के दुष्चक्र का शिकार होते जा रहे हैं। बड़गाम जिले में मई माह में कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट की हत्या का कश्मीरी पंडित समुदाय ने व्यापक विरोध किया गया था।
तब से प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत काम करने वाले पांच हजार से अधिक कश्मीरी पंडित कर्मचारी कश्मीर से लौट आए थे। कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद आशा बंधी थी कि हत्याओं और हिंसा का दौर थमेगा । यहां तक कि कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की बातें की जा रहीं हैं लेकिन पिछले कुछ दिनों में हिंसात्मक घटनाओं और इरादतन हत्याओं के दौर ने इन आशाओं को धुंधला किया है।
कश्मीर में आम नागरिकों खासकर हिन्दुओं को लक्ष्य बनाकर की जा रही हत्या को आतंकियों की नई रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, आतंकी गुटों की कमजोर स्थिति के मद्देनजर सुरक्षा बल इस संभावना से इनकार कर रहे हैं। केंद्र सरकार कश्मीर में हिंदुओं के पुनर्वास की प्रक्रिया को आगे बढ़ा चुकी है और कश्मीर विस्थापितों की संपत्ति पर से अवैध कब्जों को हटाने के लिए सरकारी मशीनरी सक्रिय है।
यह पाकिस्तान को रास नहीं आ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान से आगे बढ़कर सोचने की जरूरत है। इन हत्याओं के पीछे आतंकियों की हताशा और बौखलाहट की मुख्य वजह बताई जा रही है। दुख की बात है कि कश्मीर में क्या हो रहा है और इससे कैसे निपटा जाए केंद्र सरकार को समझ नहीं आ रहा है। केंद्र सरकार को कश्मीर की ताजा घटनाओं का विवेचन कर एक बार फिर आतंकियों को चिंहित कर नेस्तनाबूद करने की नीति बनानी होगी।
